अगवानपुर। अधिकारियों की बेरुखी से अगवानपुर ओवरब्रिज की स्थिति खराब हो गई है। देखरेख के अभाव में ओवरब्रिज में दरार पड़ गई है। पिलर के पास वाला पत्थर भी अपनी जगह से खिसक गया है। पुल पर खतरनाक गड्ढे हो गए हैं। दोनों तरफ मिट्टी की मोटी परत जम गई है।
वर्ष 2014 में अगवानपुर ओवरब्रिज का निर्माण सेतु निगम ने 47 करोड़ की लागत से शुरू किया किया था। 12 सौ मीटर लंबे और 17 मीटर चौड़े पुल का वर्ष 2017 में उद्घाटन हुआ था। इसके बाद इस पुल की देखरेख का जिम्मा किसी विभाग ने नहीं लिया। नौ साल से मुरादाबाद-हरिद्वार मार्ग को जोड़ने वाला अगवानपुर ओवरब्रिज बदहाल स्थिति में है। नियमानुसार इस पुल की देखरेख की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगवानपुर बाईपास की तरफ के पिलर के नीचे का हिस्सा चटक गया है। इस हिस्से के पास के पत्थर में लगी लकड़ी गिर गई है। एक पत्थर भी अपनी जगह छोड़ गया है। लोगों को आशंका है कि पत्थर खिसकने से हादसा हो सकता है। पुल के दोनों दीवारों पर मिट्टी की मोटी परतें जम चुकी हैं। आंधी तूफान और वाहनों से उड़कर जमा हुई मिट्टी की मोटी परत बिछ चुकी है।
मार्ग के दोनों तरफ छोटे और बड़े 50 से ज्यादा गड्ढे बन गए हैं। यदि अंधेरे में यहां से वाहन गुजरे तो बड़ा हादसा हो सकता है। हालांकि कुछ दिन पहले मिट्टी उठाकर सफाई जरूर की गई थी लेकिन बाद में पीडब्लूडी के कर्मचारियों ने काम नहीं किया। इस बारे में सेतु निगम के सहायक पीडी शशिकांत का कहना है कि नौ साल पुराना मामला है। पुल हैंडओवर हुआ है या नहीं। फाइल देखने पर ही पता चलेगा।
लोगों से बातचीत
पुल में गड्ढों और धूल की वजह से हादसे होने का खतरा बना रहता है। बच्चों को स्कूल छोड़ने के दौरान काफी संभलकर गुजरना पड़ता है। पुल के गड्ढे की मरम्मत और धूल की सफाई होनी जरूरी है।
अभिनव गुप्ता
समाजवादी सरकार में पुल का निर्माण हुआ था। हरिद्वार को जाने और मुरादाबाद को आने वाले वाहन घंटों यहां जाम में फंसे रहते थे। पुल का निर्माण तीन साल में पूरा हो गया था लेकिन नौ साल में हैंडओवर का सिलसिला समाप्त नहीं हुआ।
शाहिद नेता
पुल की देखरेख का जिम्मा किसी को नहीं दिया गया। इस कारण पुल पर साफ-सफाई नहीं होती है। पुल के गड्ढे नहीं भरते हैं और धूल जमा हो जाती है। अधिकारियों की बेरुखी पुल की बदहाली का कारण है।
दानिश सैफी
मुरादाबाद और हरिद्वार को जोड़ने वाला यह पुल बड़ा ही अहम है। इसके हैंडओवर का मामला बेहद गंभीर है। नौ साल से किसी अधिकारी ने इसको गंभीरता से नहीं लिया।
अंशुल गुप्ता