जिला पंचायत के बाद अब प्रदेश के 821 ब्लाकों पर काबिज होने के लिए सियासी जंग छिड़ गई है। सपा, बसपा और भाजपा में फिर से घमासान होने लगा है। एक एक वोट पर कब्जा करने को हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। इस समय अधिकांश बीडीसी मेंबर घरों से दूर दिग्गजों की नजरबंदी में हैं। इससे घर वालों में भी घबराहट है। सबसे ज्यादा परेशान हैं सदस्यों की पत्नियां।
जिला पंचायत की 59 सीटों पर अपना कब्जा जमाने वाली सपा ने अब 821 ब्लाकों पर जीत हासिल करने के लिए अपने सियासी योद्धा उतार दिए हैं। सभी विधायकों को कहा गया है कि जिस तरह से जिला पंचायत के चुनाव में उन्होंने रिजल्ट दिया है उसी तरह से ब्लाक प्रमुख भी अपने ही बनाएं। हालांकि ब्लाक प्रमुख के चुनाव का कोई कार्यक्रम अभी तक जारी नहीं हुआ है लेकिन दावेदारों ने बीडीसी सदस्यों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।
सपा के साथ ही भाजपा और बसपा के दावेदार भी जोर आजमाइश कर रहे हैं। सूबे में 77 हजार 953 बीडीसी मेंबर हैं। इनमें से अधिकांश अपने घरों पर नहीं हैं। कोई मंत्री जी की सरपरस्ती में है तो कोई विधायक की निगहबानी में। अब क्षेत्र पंचायत सदस्यों के घरों से दूर होने के कारण परिवार वाले परेशान हैं। घर के काम प्रभावित होने लगे हैं। अगर महिलाएं घर से संबंधित सामान मंगवाएं भी तो किससे।