वीर सिंह के परिचित मनोज कुमार के पास लोन के लिए जाते थे तो मनोज उनसे पैसे मांगता था। वीर सिंह ने उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत कर दी थी। इसी कारण मनोज उनसे रंजिश रखने लगा और उसने वीर सिंह की हत्या की साजिश रची।
इसके लिए उसने अपनी प्रेमिका शिक्षिका वीरबाला यादव से वीर सिंह की दोस्ती करा दी। 16 अगस्त की शाम को शिक्षिका ने कॉल करके वीर सिंह को मिलने के बहाने एमडीए ऑफिस के पास बुला लिया, वहां से वीरबाला वीर सिंह की बाइक पर बैठकर चंदौसी कट के पास पहुंची।
पीछे से कार से पहुंचे मनोज कुमार और अनिल ने वीर सिंह को खींचकर कार में डाल दिया। आरोपियों ने पहले हाथ से वीर सिंह का गला दबाया और बाद में रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव फेंक कर आरोपी फरार हो गए थे। सोमवार दोपहर बाद पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
एक कैमरे में पुलिस को वीर सिंह की बाइक आती दिखी। इसके ठीक पीछे एक कार भी जाती दिख रही थी। इस कार का नंबर पता करने के लिए पुलिस ने 750 कैमरों की फुटेज खंगाली। शहर से लेकर हाईवे और टोल प्लाजा के कैमरों की फुटेज खंगाली तो कार का नंबर मिल गया। कार के नंबर के जरिये पुलिस आरोपी मनोज तक पहुंच गई थी। इसके बाद कड़ी से कड़ी जोड़कर पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर दिया।
हत्याकांड के खुलासे में ये रहे शामिल
मैनाठेर थाना प्रभारी किरनपाल सिंह, एसओजी प्रभारी अमित कुमार के नेतृत्व में पांच टीमें इस केस पर काम कर रही थीं। जिसमें सर्विलांस सेल के हेड कांस्टेबल अनिल कुमार, मैनाठेर के एसआई अशोक कुमार, महिला एसआई परमेंद्री, हेड कांस्टेबल आदेश कुमार, सिपाही मोहर सिंह, प्रदीप कुमार, महिला सिपाही पिंकी और हेड कांस्टेबल ओमपाल सिंह शामिल रहे। एसएसपी सतपाल अंतिल ने खुलासा करने वाली टीम को इनाम देने की घोषणा की है।