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जासूस बने शिक्षक: सोशल मीडिया पर छात्रों की निगरानी, दूसरे नाम से बच्चों की फ्रेंड लिस्ट में हो रहे शामिल

Tue, 27 Aug 2024 03:33 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो नीलम सिंह, अमर उजाला मुरादाबाद

सार

सोशल मीडिया को लेकर छात्रों में जबरदस्त क्रेज है। वह लगातार इसमें एक्टिव रहते हैं। ऐसे में कोई गलत राह नहीं पकड़ें इसलिए शिक्षक उन पर नजर बनाएं रखते हैं। अगर बच्चे कोई गलत हरकत करते हैं तो वह उनको समझाते हैं। 
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शिक्षक। (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से अभिभावक ही नहीं, शिक्षक भी परेशान हैं। स्कूलों में इसकी शिकायतें पहुंच रही हैं। इसकी निगरानी के लिए शिक्षक दूसरे नाम से आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर विद्यार्थियों की फ्रेंड लिस्ट में जुड़ जाते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।

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प्रधानाचार्यों का कहना है कि किसी भी खराब परिस्थिति से बच्चों को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे काफी मदद मिल रही है। जब भी सोशल मीडिया पर किसी बच्चे की कोई गलत गतिविधि दिखाई देती है, तो उसे समझाने के साथ ही काउंसलिंग भी कराई जाती है।

एडिट कर शिक्षिका की फोटो कर दी अपलोड

एक स्कूल का कक्षा 11 का एक छात्र देर रात तक ग्रुप चैटिंग करता था। एक दिन उसने अपनी शिक्षिका की फोटो एडिट करके सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी। जब उस फोटो को उसके दोस्त ने देखा तो शिक्षिका को इस बात की जानकारी दी। स्कूल में हंगामा होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। प्रधानाचार्य का कहना है कि छात्र के अभिभावकों ने लिखित में माफी मांगी। साथ ही छात्र को एंड्रायड फोन न देने का आश्वासन दिया। इसके बाद मामले में समझौता हो सका।

दोस्तों के साथ की मारपीट

कक्षा नौ का एक छात्र सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ गेम खेलता था। गेम खेलने के दौरान आपस में झगड़ा हो गया और फिर सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को धमकी देने लगे। इसके बाद एक दिन मौका मिलते ही उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर दूसरे छात्र को पीट दिया। अभिभावकों ने स्कूल में हंगामा किया। बाद में जब सोशल मीडिया पर ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान हुए झगड़े की बात सामने आई तो मामला शांत हुआ।

साथी छात्रा के लिए लिखीं गलत बातें

एक स्कूल की कक्षा नौ की छात्रा पढ़ने में मेधावी है। उससे दूसरी छात्राएं चिढ़ती थीं। उनमें से ही एक छात्रा ने फर्जी आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर मेधावी छात्रा के लिए गालियां लिख दीं और उसकी व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में लिखा। इसके अलावा उसके चरित्र से संबंधित बातें लिखीं।

एक दोस्त ने छात्रा को इसकी जानकारी दी तो वह अवसाद में चली गई। पढ़ाई प्रभावित हुई तो शिक्षकों ने ध्यान दिया। बाद में साइबर विशेषज्ञों की मदद आरोपी छात्रा का पता चला और अभिभावकों को हिदायत देकर मामला शांत हुआ।

सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए विद्यार्थियों की नियमित काउंसलिंग करवाई जा रही है। यदि कहीं परेशानी आती है तो साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से भी बच्चों की काउंसलिंग करवाई जाती है। इसके साथ ही अभिभावक और शिक्षकों से मदद ले रहे हैं। - डॉ. हेमंत झा, प्रधानाचार्य, आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल

पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव के मामले आए है, लेकिन विशेषज्ञों, शिक्षकों और अभिभावकों की मदद से समस्याओं का समाधान हो सका। शिक्षक लगातार सोशल मीडिया की निगरानी कर रहे हैं तो अभी कोई ऐसा मामला नहीं है। - सुनीता भटनागर, प्रधानाचार्य, बोनी एनी पब्लिक स्कूल

कोरोना काल के बाद एकाएक ऐसे मामलों की संख्या बढ़ गई थी। इसके लिए शिक्षक सोशल मीडिया पर विद्यार्थियों की फ्रेंड लिस्ट में जुड़ रहे हैं। इसके अलावा प्रार्थना सभा में भी विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाता है। -वंदना छावड़ा, प्रधानाचार्य, आरआरके स्कूल

अभिभावकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ना होगा और यदि बच्चे भटकते हैं तो स्पष्ट बात करें। डांटने-फटकारने के बजाय धैर्यपूर्वक बच्चों की बात को सुनें और समस्या के समाधान का प्रयास करें। अभिभावक बच्चों के दोस्तों से भी जुड़ें और उनका बैकग्राउंड देखें। शिक्षकों से भी वार्ता कर बच्चों की कमियों को दूर करवाने का प्रयास करें। - डॉ. नीरज गुप्ता, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ

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सोशल मीडिया के माध्यम से अपराध बहुत बढ़ गया है। स्थिति यह है कि पुलिस के पास आने वाली सौ में से 20 शिकायतें साइबर क्राइम से जुड़ी होती हैं। कम उम्र के बच्चे भी इस तरह के अपराध में शामिल हो रहे हैं। वे भी अपनी फर्जी आईडी से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना, गलत मीम्स बनाना सहित कई अन्य तरह की गतिविधियां करते हैं। स्कूलों में जाकर बच्चों को इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है। - सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी क्राइम
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