नारी निकेतन, किशोर सुधार गृह और बाल सुधार गृह का जब भी जिक्र होता है तो जेहन में एक गंदी जगह की तस्वीर घूमने लगती है। लगता है गंदा फर्श, मैली दीवारें और नल और टंकी पर इधर उधर खाने पीने की चीचें पड़ी होंगीं। लेकिन आजाद स्थित बाल गृह (ओपन स्लाटर हाउस )इन सब से परे है। यहां साफ सफाई के साथ ही सुबह होते ही बच्चों को स्नान कराया जाता है। उन्हें टीचर पढ़ाती हैं तो मनोरंजन के लिए टीवी देखने और खेलने कूदने का भी पूरा वक्त दिया जाता है।
गर्मी में बच्चों के लिए पंखे कूलर तो लगे ही हैं साथ ही ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज भी हैं। इन सब सुविधाओं के बावजूद भी बच्चों की जिंदगी में एक बड़ी कमी है मां-बाप की। जिनके बिना बच्चों का एक पल भी बताना मुश्किल होता है। लेकिन इन 17 बच्चों को अपने मां-बाप का इंतजार है। सुबह से श्याम और श्याम से रात। ये सोच कर बीत जाती है। शायद कल मम्मी पापा आएंगे और उन्हें अपने साथ ले जाएंगे। बच्चों का कहना है कि मम्मी पापा और भैया की बहुत आती है।
लेकिन वह न जाने कहां चले गए। यहां अंकल और आंटी तो बहुत आतीं हैं। वह उन्हें फल और खिलौनी देती हैं। लेकिन हमारे कोई नहीं आते। महिला व बाल विकास विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित बाल आश्रय गृह में दस साल तक बच्चों को रखा जाता है। जिसका संचालन सोभना ग्रामोदय सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है।