प्रदेश में तीन करोड़ एपीएल कार्ड धारकों का गल्ला ‘गोल’ हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा हर माह जो एपीएल परिवारों के लिए अतिरिक्त कोटा जारी किया जाता था वह इस बार से रोक दिया गया है। केंद्र के इस फैसले से बड़ा संकट खड़ा हो गया। अब तक एपीएल परिवारों को दस किलो अनाज दिया जा रहा था मगर अब पांच किलो भी मुश्किल हो जाएगा।
प्रदेश में तीन करोड़ 70 लाख एपीएल कार्ड धारक हैं। हर महीने इन्हें गेहूं और चावल का वितरण किया जाता है। क्योंकि एपीएल परिवारों में बीस फीसदी कार्ड धारक ऐसे होते हैं जिन्हें राशन की जरूरत ही नहीं पड़ती लिहाजा उसी तरह से खाद्यान्न का एलाटमेंट भी किया जाता है। पिछले दो साल से केंद्र सरकार एपीएल परिवारों के लिए अतिरिक्त कोटा जारी करती रही है। जिससे एपीएल परिवारों में भी गरीबों का चिन्हीकरण करके उन्हें गेहूं और चावल दिया जाता था। दस किलो राशन प्रति कार्ड धारक मिल रहा था।
केंद्र से हर माह प्रदेश के लिए करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन अनाज अतिरिक्त एपीएल के कोटे में दिया जा रहा था मगर सितंबर में अतिरिक्त कोटा रोक दिया गया है। यानी अक्तूबर में एपीएल परिवारों को जो दस किलो अनाज मिलता था वह मुश्किल से पांच किलो रह जाएगा। चीफ मार्केटिंग आफिसर सुधाकर मिश्र ने बताया कि केंद्र सरकार ने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट लागू करने के लिए 30 सितंबर तक का वक्त दिया था मगर अभी तक प्रदेश में लागू नहीं हो पाया है।
इस पर केंद्र सरकार ने एपीएल परिवारों का मिलने वाला अतिरिक्त कोटा रोक दिया है। केंद्र ने आदेश जारी किया है कि जब तक खाद्य सुरक्षा बिल लागू नहीं हो जाएगा अतिरिक्त कोटा जारी नहीं करेंगे। कुल मिलाकर अफसरों की लापरवाही की सजा मिल रही है प्रदेश के तीन करोड़ कार्ड धारकों को। अफसरों का कहना है कि अभी केंद्र से खाद्य बिल के लिए कुछ समय मांगा जा रहा है।