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विहिप के धर्मसभा पर आजम खान का बयान, कहा- 'चुनाव है न इसी से वोट मिलेगा'

Sat, 24 Nov 2018 08:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरादाबाद
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आजम खान - फोटो : अमर उजाला
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रविवार को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप के धर्मसभा को लेकर आजम खान ने बयान दिया। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताया। कहा कि इसी से वोट मिलेगा।
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अयोध्या में हो रहे जमावड़े के सवाल पर आजम खां ने कहा कि ये कहिए कि देश के सबसे बहादुर लोग जो छह दिसम्बर 1992 को अकेली पुरानी इमारत को गिराने में कामयाब हो गये और बहादुरी का काम हुआ। एक तरफा बहादुरी छह दिसम्बर को हुई थी दूसरी बहादुरी फिर कर लें। दोनों बहादुरी इतिहास में लिखी जायेंगी। फौज पहले भी लगी थी। इसमें फौज पीएसी से मतलब नहीं होता। आदेश और हाकिम की नीयत से मतलब होता है।

उन्होंने कहा कि हाकिम खामोश, तमाशाई बना हुआ है। बहुत बहादुरी की बात है दूसरा शौर्य दिवस मनायेंगे। चुनाव है न इसी से वोट मिलेगा। चार पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगारी से तंग आकर ट्रेन के आगे कूद गये जिनमें से तीन हलाक हो गये। एक जिन्दगी मौत की लड़ाई लड़ रहा है। कोई और देश होता तो लोग सड़कों से वापिस नहीं जाते जबतक उतना ही खून सत्ता का न बह जाता।
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अब हमारे यहां इतिहास में सबसे बड़ा कारनामा छह दिसम्बर को हुआ। बाकी तो बाहर से हुक्मरां आते रहे और हम पर हुकूमते करते रहे। अब हो सकता है दूसरा बड़ा बहादुरी का काम। कोर्ट को खुली चुनौती नहीं बल्कि अधिकार है। जाहिर है पांच साल कुछ तो किया नहीं है पांच दिन में कुछ तो कर के दिखाना है। भूख से मरते बिलखते लोगों को कुछ तो दिखाना है। 

यूएनओ के सवाल पर आजम खां ने कहा कि ऐसे में एक बार फिर हमारी यूएनओ से अपील है क्योंकि हमारा देश पूरी दुनिया का जवाबदेह है कि वो कौन सा काम गैर इंसानी कर रहा है। यूएनओ यह अपनी बात कि अमेरिका की कठपुतली आॅर्गनाइजेशन है लेकिन फिर भी हम एक बार चिट्ठी लिख चुके हैं। दोबारा हम उनसे अपील करना चाहते हैं कि इन हालात पर वो नजर रखे और कहीं ऐसा न हो छह दिसम्बर 92 जैसा कि जब रामजानकी रथ चला था उस जैसा माहौल देश में बने।

क्योंकि संग्राम, महासंग्राम, संघर्ष, टकराव में मुसलमान कहीं नहीं है। मुसलमान अपने आप से, अपनी व्यवस्था से, देश के लोकतंत्र से बहुत मायूस है और कोई उसको रास्ता भी सुझाई नहीं देता। बहुत नाउम्मीदी और मायूसी के दौर से मुसलमान गुजर रहा है। बहुत अपमानजनक और जुल्म से भरी जिन्दगी गुजार रहें हैं।
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