ये अफसरों के गजब प्रबंधन और फोर्स की मुस्तैदी का ही नतीजा है कि संवेदनशील माने जा रहे मुरादाबाद जिले में बगैर कोई पत्ता हिले खामोशी से मतदान हो गया। अफसरों की रणनीति कामयाब रही और सुबह से लेकर शाम तक पूरे जिले में कहीं से भी हिंसा तो छोड़िए, मामूली झड़प तक की सूचना नहीं मिली।
डीएम ने मंगलवार शाम को फोर्स को एक्शन की खुली छूट देकर साफ कर दिया था कि उपद्रवियों से बात लाठी से ही होगी। नतीजतन जिले मेें कहीं भी कोई उपद्रवी बूथों तक फटकने की हिम्मत नहीं जुटा सका।
मुरादाबाद जिले की गिनती सूबे के संवेदनशील जिलों में होती है। खासकर चुनावों को लेकर यहां चुनाव आयोग की भी खास नजर रहती है। यहां के सुरक्षा बंदोबस्तों की कई बार समीक्षा होती है। लेकिन इस बार कमाल हो गया।
अफसरों ने ऐसी प्लानिंग की कि उपद्रवी घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। जिले की सभी छह सीटों पर बेहद खामोशी के साथ मतदान हुआ। दरअसल डीएम जुहैर बिन सगीर ने पूरे जिले को 167 सेक्टर व तीस जोन में बांटकर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए थे।
पूरे जिले में 11 अंतर राज्यीय और 44 अंतर जनपदीय व 19 स्टेटिक बैरियर बनाए गए थे। हर बूथ पर फोर्स लगाने के साथ ही सीसीटीवी कैमरे व डिजिटल कैमरों से निगरानी कराई जा रही थी। सर्विलांस को भी दो टीमें बनाई गई थीं।
एक टीम को शहर और दूसरी टीम को ग्रामीण इलाके में लगा गया था। 55 कंपनी पैरामिलिट्री व 4 हजार पुलिस कर्मी और साढ़े पांच हजार होमगार्ड भी लगाए थे।