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Moradabad News: निलंबन आदेश पर कुलपति के निर्णय का इंतजार

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मुरादाबाद। केजीके कॉलेज के प्राचार्य के निलंबन के बाद अब कुलपति, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के फैसले का इंतजार है। प्राचार्य ने शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा उप्र के पत्र के आधार पर प्रबंधक की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है, जबकि प्रबंधक का कहना है कि निलंबन की सूचना कुलपति को दे दी गई है।
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प्रबंधक विवेक खन्ना ने शनिवार को प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को प्रशासनिक अक्षमता और वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित किया। साथ ही सभी जिम्मेदारियां प्रो. विनोद कुमार पांडेय को सौंपने के निर्देश दिए। हालांकि प्राचार्य ने अभी चार्ज नहीं सौंपा है।
प्राचार्य के अनुसार, सितंबर 2024 में शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा ने आदेश जारी किया था कि अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राचार्य/शिक्षक को दंडित करने संबंधी प्रबंधतंत्र के आदेश तब तक लागू नहीं होंगे, जब तक कुलपति से अनुमोदन न मिल जाए।
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प्राचार्य पक्ष के शिक्षकों का कहना है कि प्रबंधक का आदेश शिक्षा निदेशक के निर्देशों के विपरीत है।



वर्जन...

शिक्षा निदेशक उच्च शिक्षा पत्र गलत नहीं है, इसकी व्याख्या के आधार अलग-अलग हो सकते हैं। विश्वविद्यालय एक्ट में लिखा है कि बर्खास्तगी में तो हमेशा अनुमोदन जरूरी है। निलंबन में वह चाहें तो है। इस चाहें में बहुत शक्तियां हैं। चूंकि प्रबंध समिति कालातीत है। प्रबंधक सीधे निलंबित नहीं कर सकते। प्रबंध समिति की बैठक के आधार पर कर सकते हैं लेकिन प्रबंध समिति की बैठक नहीं हुई। मैं इस समिति का पदेन सदस्य हूं। मुझे बुलाया नहीं गया। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव होंगे। एक सदस्य मुरादाबाद में रहते हैं, वह नहीं गए। एक शिक्षक प्रतिनिधि विदेश गए हैं। न एजेंडा है और न प्रस्ताव है। प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। ऐसे में कुलपति के पास पर्याप्त आधार हैं। मुझे कुलपति पर पूरा भरोसा है। सोमवार को मैं अधिकारियों से मुलाकात करुंगा।
प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य केजीके कॉलेज
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हम कुलपति को इस संबंध में लिख चुके हैं और फिर निलंबन भी किया है। यदि कुछ गलत होगा तो इस संबंध में कुलपति बताएंगे कि यह गलत है। निलंबन के बाद वह कुलपति से संपर्क कर सकते हैं कि हमारा निलंबन गलत हुआ है और कुलपति के यहां अपना पक्ष रख सकते हैं।

विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज

केजीके कॉलेज की क्रिकेट अकादमी के संचालन पर उठे सवाल

मुरादाबाद। केजीके कॉलेज में प्रबंधक-प्राचार्य विवाद के बीच क्रिकेट अकादमी के संचालन पर भी सवाल उठे हैं। शिक्षकों की शिकायत पर प्रबंधक ने प्राचार्य से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की बात कही।
शिक्षकों का दावा है कि अकादमी का संचालन किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। यहां मैच के लिए रसीद काटी जाती है और वॉक करने वालों से भी शुल्क लिया जाता है।
प्रबंधक विवेक खन्ना ने बताया कि इस संबंध में प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मैदान के रखरखाव पर आपत्ति नहीं है, उद्देश्य कॉलेज के छात्रों को लाभ पहुंचाना है।
प्रबंधक के अनुसार, चार्जशीट में भी इस मुद्दे को शामिल किया गया है। प्राचार्य को क्रिकेट अकादमी के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाने का नोटिस दिया गया था, लेकिन चयन प्रक्रिया पर कोई जानकारी नहीं दी गई। प्राचार्य ने इसे बॉयज फंड से जुड़ा मामला बताते हुए टेंडर की जरूरत से इन्कार किया।
प्रबंधक का कहना है कि स्थिति को देखते हुए अकादमी का संचालन अवैध प्रतीत होता है और इस पर प्राचार्य से लिखित जवाब मांगा गया है। संवाद

टूटे कमरों का सामान बेचने का आरोप

परिसर स्थित जर्जर कमरा संख्या 11, 12 और 13 का ध्वस्तीकरण किया गया है। प्रबंधक का आरोप है कि शिक्षकों ने शिकायत की है कि इन कमरों के टूटने के बाद जो सामान था, वह बेच दिया है। इस संबंध में जब उनसे स्पष्टीकरण मांगा तो कह दिया कि हमारे पास इसके फोटो हैं। हमने प्राचार्य से कहा कि इसकी अनुमति लेनी चाहिए थी। सामान बेचने का अधिकार किसने दिया। इसके अलावा प्राचार्य ने परिसर स्थित शौचालय को बिना कोई अनुमति लिए ही तोड़ दिया था। अब चार्जशीट में इन बिंदुओं पर भी जवाब मांगे गए हैं।



प्राचार्य का पक्ष: क्रिकेट अकादमी संचालन पर दी सफाई
केजीके कॉलेज में क्रिकेट अकादमी के संचालन को लेकर उठे सवालों पर प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि प्रबंधक 20 बिंदुओं पर विशेष ऑडिट करवा चुके हैं, जिसमें खेल समिति की प्रक्रिया को सही पाया गया है। प्राचार्य के अनुसार, अकादमी के लिए पूरे मैदान के बजाय केवल एक कोना दिया गया है, जिससे मैदान के विकास में मदद मिलती है। यह सहयोग पीपीपी मॉडल के तहत है, जैसा कि सरकार के निर्देशों में भी उल्लेखित है। उन्होंने कहा कि मैदान का दिन में उपयोग नहीं होता, केवल शाम के समय सीमित क्षेत्र में गतिविधियां होती हैं। टहलने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। बड़े मैचों की फीस कॉलेज खाते में जमा होती है, जबकि छोटे बच्चे यहां अभ्यास करते हैं। प्राचार्य ने यह भी कहा कि निलंबन पत्र में इस मुद्दे का उल्लेख नहीं है और मैच अवकाश के दिनों में ही कराए जाते हैं। 20 बिंदुओं पर हुई जांच की विस्तृत रिपोर्ट खेल समिति उपलब्ध करा सकती है।


प्रो. सुनील की जगह डॉ. राजदेव ने करवाई नीट की परीक्षा

मुरादाबाद। केजीके कॉलेज में यूजी नीट 2026 के लिए केंद्र बनाया गया था। यहां पर 600 विद्यार्थी आवंटित किए गए थे। शनिवार को प्रबंधक विनोद खन्ना द्वारा प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर दिया गया था और कॉलेज में प्रवेश पर भी रोक लगा दी है। इसके बाद रविवार को प्रो. सुनील चौधरी की जगह केंद्र अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजदेव सिंह ने परीक्षा करवाई। उनका सहयोग डिप्टी सीएस विनोद कुमार गंगवार और डिप्टी सीएस प्रो. एके सिंह ने किया। प्रो. एके सिंह ने बताया कि विद्यार्थियों को कोई असुविधा नहीं होने दी गई। परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई है।
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