अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम पर मंगलवार को लोगों ने हमला कर दिया। इसमें टीम के चार सदस्य घायल हो गए। लोग दुकानों के सामने के रैंप तोड़ने और पार्क के किनारे लगाई गई दीवार गिराने से नाराज थे। टीम को महिलाओं के विरोध का भी सामना करना पड़ा। कांठ रोड स्थित मधुबनी कालोनी में पार्क को सड़क की दिशा में दीवार लगाकर जबरन बंद कर दिया गया था। दुकानों के आगे चबूतरे बनाकर अतिक्रमण किया गया था।
नगर निगम ने इसको अतिक्रमण मानते हुए लोगों से हटाने को कहा था, लेकिन वह इसको अपनी जमीन बता रहे थे। पार्क की दीवार को कालोनी की सुरक्षा के लिए जरूरी बताकर पार्क में घूमने वाले राहगीरों को रास्ता देने को तैयार नहीं थे। इसके चलते नगर निगम की टीम मंगलवार दोपहर अतिक्रमण गिराने पहुंची। टीम ने पार्क के किनारे गणेश शंकर विद्यार्थी की मूर्ति के सामने लगाई गई दीवार गिरा दी। दुकानों के सामने बनाए गए चबूतरे तोड़ दिए। इस दौरान एक खोखा भी तोड़ दिया गया।
इससे नाराज लोगों ने जेसीबी मशीन और टीम पर हमला बोल दिया। महिलाएं जेसीबी मशीन के सामने बैठ गईं। निगम की टीम पर पथराव कर दिया। इसमें अतिक्रमण अभियान का नेतृत्व कर रहे लाला बाबू, ट्रैक्टर के ड्राइवर जबर सिंह और कर्मचारी यूसुफ व प्रताप घायल हो गए। टीम को विरोध का अंदाजा नहीं था, जिसके चलते फोर्स मौके पर नहीं थी। हंगामे और हमले की सूचना मिलने पर नगर आयुक्त ने पुलिस को मौके पर भेजा। लाला बाबू की ओर से पांच लोगों को नामजद कर 12 के खिलाफ तहरीर पुलिस को दी गई है।
कालोनी के लोगों का कहना है कि उक्त दीवार 2010 में एमडीए ने कोर्ट के आदेश पर लगवाई थी। एक बिल्डर को पार्क से रास्ता देने के लिए दीवार को गिराया गया है। बेवजह चबूतरों को तोड़ दिया गया, जबकि वहां से कोई नाला भी नहीं निकल रहा है। रिकार्ड के दुकानों के सामने के चबूतरे और पार्क की दीवार चढ़ी हुई हैं। कालोनी के लोगों और दुकानदारों ने दोपहर में नगर आयुक्त से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। टीम को कटघर क्षेत्र में भी विरोध का सामना करना पड़ा।
अतिक्रमण की शिकायत पर नगर आयुक्त ने टीम को सीधे मौके पर भेज दिया था। उन्होंने निर्माण विभाग के एक्सईएन और जेई को टीम के साथ मौके पर जाने को कहा था। नगर आयुक्त का सीधे आदेश देना अतिक्रमण प्रभारी अवधेश कुमार को नागवार लगा। इस कार्रवाई से वह खिन्न दिखे। पूरे मामले से खुद को किनारे करते हुए अवधेश कुमार ने बताया कि मुझको कुछ पता नहीं है। टीम भेजने वाले ही इस बारे में जानकारी देंगे। नगर आयुक्त ही बताएंगे कि क्या हुआ? मुझको किसी ने बताया ही नहीं है।
बुजुर्ग नत्थूलाल ने बताया कि एक खोखा एमडीए द्वारा आवंटित किया गया था। टीम ने उसको भी गिरा दिया। अब परिवार के भरण-पोषण का भी सहारा नहीं है। उन्होंने नगर आयुक्त को एमडीके कागजात भी दिखाए। नगर आयुक्त ने नत्थूलाल को आश्वस्त किया कि जांच के बाद उसका अपेक्षित सहयोग किया जाएगा।