मुरादाबाद। मझोला मंडी परिसर को हर माह की 15 तारीख को बंद रखने के मंडी प्रशासन के आदेश को आढ़तियों और व्यापारियों ने मनमाना बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। आढ़तियों का कहना है कि यह फैसला मंडी नियमावली के विपरीत है और किसानों, व्यापारियों और श्रमिक वर्ग के हितों पर सीधा प्रहार करता है। आढ़तियों के अनुसार वर्तमान में मंडी के अधिकांश कमीशन एजेंट और व्यापारी 15 तारीख को भी मंडी संचालन के पक्ष में हैं। कुछ लोगों ने विरोध में अपनी दुकानें भी खोली।
आढ़ती संगठनों का कहना है कि मंडी खुलने से प्रतिदिन 10-15 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। इनमें आढ़ती, मुनीम, पल्लेदार, तौल कर्मचारी, वाहन चालक, सफाईकर्मी और अन्य दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह दैनिक कमाई पर ही निर्भर है। मंडी बंद रहने की स्थिति में इन सभी के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है और उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक असर पड़ता है।
आढ़ती-व्यापारी संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि मंडी बंदी का असर आम जनता पर भी पड़ेगा। 15 तारीख को मंडी बंद रहने से फल और सब्जियों की सप्लाई रुकेगी और महंगाई बढ़ेगी जिसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा। इसके अलावा किसानों को भी नुकसान झेलना पड़ेगा। वहीं व्यापार न होने से मंडी शुल्क और अन्य करों की वसूली भी नहीं हो सकेगी जिससे हर माह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी होगा।
आढ़तियों ने उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि मंडी के कार्यदिवस या अवकाश का निर्णय मंडी समिति के सामूहिक और विधिवत निर्णय से, आढ़तियों और किसानों की सहमति के आधार पर होना चाहिए। इस संबंध में संगठन ने मंडी सचिव को ज्ञापन भी दिया है। संगठन की मांग है कि मंडी को महीने में नियमित रूप से 29 दिन खोला जाए और केवल 30 या 31 तारीख को एक दिन अवकाश रखा जाए।
- क्या बोले आढ़ती
- मंडी को हर माह बंद करने से लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। यह पूरी तरह से मनमाना फैसला है। कई लोग रोज कमाते-खाते हैं उनकी रोजी-रोटी पर संकट आएगा। - जयपाल सिंह, संरक्षक, आढ़ती-व्यापारी संगठन
- दुकानें बंद होने से कई आढ़तियों के साथ-साथ दैनिक मजदूरों को नुकसान हुआ है। मंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है। बंदी का फैसला वापस लेना चाहिए। - केके सैनी, अध्यक्ष, आढ़ती व्यापारी संगठन
- मंडी प्रशासन को ज्ञापन दिया जिसपर कोई जवाब नहीं मिला। हर महीने की 15 तारीख को मंडी बंद रखना पूरी तरह से अर्थहीन है। - राजू सारंग, सचिव, आढ़ती-व्यापारी संगठन