मुरादाबाद। एमडीए ने वर्ष 2016-17 के दौरान मऊ गांव के रकबे में विकसित की कांशीराम नगर आवास योजना भी अपने उद्देश्य में सफल नहीं रही है। आधे आवास यहां एक दशक बाद भी खाली पड़े हैं, जो यहां रह रहे हैं, उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रहीं। जलनिकासी न होने के कारण बारिश के दिनों में पूरी कॉलोनी को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है। अब जब रेलवे ने अपनी जगह को चिन्हित किया तो पता चला कि एमडीए ने रेलवे की जगह में रास्ता दिखाकर कॉलोनी विकसित कर दी। अब मुख्य रास्ते की समस्या भी सामने आ गई है।
एमडीए ने प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल में मऊ गांव के क्षेत्र में मान्यवर कांशीराम जी नगर आवास योजना की कार्ययोजना तैयार की थी, बनने में भी समय लगा, वर्ष 2016-17 में तैयार हो गई, इसके बाद इसका आवंटन किया गया। इस योजना में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 123 आवास बनाए गए, जिन्हें आवंटित भी कर दिया। आवंटन तो ले लिया लेकिन जब यहां सुविधाएं देखीं लोगों का मन हट गया। यही कारण है कि शुरू से ही करीब 40 मकान खाली पड़े हैं। जिससे लंबी लंबी खास उग आई है, लोग कूड़ा फेंक रहे हैं, जिससे गंदगी हो रही है।
थोड़ी से बारिश में हो जाता है जलभराव
- दलित वर्ग को दस साल पहले 2.65 लाख रुपये में एक आवास दिया गया था, लेकिन एमडीए ने इसके तल को नीचे बना दिया। अब यहां से जलनिकासी कहीं होती ही नहीं है, जिसके कारण यहां थोड़ी सी बारिश में जलभराव हो जाता है।
हरिनंदन प्रसाद।
इंजीनियरों ने बनाते समय नहीं रखा ध्यान
- जब इस कॉलोनी को बनाया गया था, उसी समय इंजीनियरों को जल निकासी योजना पर ध्यान देना चाहिए था। आवास खरीदते समय तो आवंटियों की समझ में नहीं आया लेकिन जब रहना शुरू किया तो दिक्कतें सामने आई, अब रहना मुश्किल हो रहा है।
-संजीव कुमार।
पूरी योजना की सभी नालियां टूटी हैं
- दो दिन पहले रात को बारिश हुई, तो अभी तक यहां से निकलना दूभर हो रहा है, खासकर महिलाओं को आने जाने व बच्चों को स्कूल जाने में भारी असुविधा होती है। पूरी आवास योजना में सभी नालियां टूटी पड़ी है, कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
अलका।
- खाली पड़े भवनों में लंबी लंबी घास उग चुकी है, जहरीले कीड़े भी निकलते हैं, यहां लोग गंदगी भी डालते हैं, एमडीए का कोई कर्मचारी कभी भी सफाई या कूड़ा उठाने नहीं आता है, जिससे यहां के लोगों को रहना दुश्वार है।
रामवती।
एमडीए से मिले सिर्फ आश्वासन
- न तो सड़क है, न जल निकासी की व्यवस्था, जब सुबह नगर निगम का पानी आता है तो घरों का पानी सड़कों पर भर जाता है, जिससे लोगों को रोजाना ही जलभराव का सामना करना पड़ता है, कई बार एमडीए से शिकायत की लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिले।
मोनिका।
अब तो मुख्य रास्ते का भी संकट है
- यहां कोई सड़क ठीक नहीं है, अब तो यहां के लोगों के सामने मुख्य रास्ते का भी संकट आ गया है, क्योंकि जो रास्ता एमडीए ने अपना बताकर मानचित्र में दिखाया था, वह जगह तो रेलवे की है, रेलवे अब अपनी जमीन पर कब्जा लेना चाहता है।
अर्जुन सिंह।
एमडीए की अनदेखी से नरकीय जीवन जी रहे लोग
- दो दिन पहले बारिश से इतना जलभराव हुआ कि उनके आवास के बाथरूम में भी पानी भर गया। एमडीए से कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं है। एमडीए की अनदेखी से लोग नरकीय जीवन जीने को विवश हो रहे हैं।
-परवेज आलम।
वर्जन
- एमडीए की जो भी कॉलोनियां हैं, उनमें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। किसी को दिक्कत है तो एमडीए कार्यालय में शिकायत करे, उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है।
अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष एमडीए।