मुरादाबाद। जिले में निजी स्कूलों की ओर से 102 अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोने का काम किया जा रहा है। जबकि स्कूलों द्वारा बच्चों को अच्छी सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूला जाता हैं।
जिले में अनफिट बसें और चालकों का सत्यापन नहीं होने की वजह पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद स्कूली वाहनों को लेकर स्कूल प्रबंधक कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। वहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों ने पिछले छह महीने में बिना फिटनेस की चलते पाए जाने वाले 20 स्कूली वाहनों पर चालान की कार्रवाई की है।
परिवहन विभाग में निजी स्कूलों की ओर से 860 वाहनों का पंजीकरण कराया गया है। इन बसों को दो साल में फिटनेस कराना होता है। इसके बावजूद 102 स्कूली वाहन अनफिट सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से स्कूली बच्चों का लाने व ले जाने का काम किया जाता है। वहीं परिवहन विभाग की ओर से यातायात माह के तहत अभियान चलाकर यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जा रहा है ताकि अनफिट स्कूली वाहनों से हादसे न हों, बच्चे सुरक्षित हों। इसके बावजूद स्कूलों की ओर से वाहनों का फिटनेस नहीं कराया जा रहा है। किसी स्कूली वाहन का दो साल से तो किसी का छह महीने पहले फिटनेस खत्म हुआ है।
परिवहन विभाग के अनुसार, 758 स्कूली वाहनों का फिटनेस कराया गया है। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्कूल बसों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स सहित तमाम बिंदुओं पर ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करता है। जांच के दौरान जिन स्कूली वाहनों में कमी रहती है उसका फिटनेस प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता है।