मुरादाबाद। मानदेय वृद्धि सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्परों ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने उनके साथ वादाखिलाफी की है। उनका कहना था कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री को आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्परों की मांगों पर विचार करना चाहिए।
आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन से संबद्ध अखिल भारतीय आंगनबाड़ी सेविका सहायिका फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि फेडरेशन का एक प्रतिनिधिमंडल 6 दिसंबर 2025 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी से मिला था। इसके बावजूद आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्परों की मांगों की अनदेखी की गई। उनका आरोप है कि भारत सरकार लेबर कोर्ट के माध्यम से सभी वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देने का दावा कर रही है, जबकि आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्परों का मानदेय वर्षों से नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
केंद्रीय मंत्री को संबोधित ज्ञापन फेडरेशन की प्रदेश महामंत्री चमन आरा एवं जिलाध्यक्ष मिशलेश ने एडीएम प्रशासन संगीता गौतम को सौंपा। ज्ञापन में आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्परों को ग्रेड थर्ड एवं फोर्थ का दर्जा देकर सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग की गई।
नियमितीकरण होने तक प्रतिमाह कम से कम 26,000 रुपये वेतन और 10,000 रुपये पेंशन देने, पूरे देश में समान सेवा शर्तें लागू करने, आईसीडीएस का निजीकरण न करने, एफआरएस और ई-केवाईसी के नाम पर किसी को न हटाने, आईसीडीएस को अच्छी गुणवत्ता वाले भोजन एवं शिक्षा के साथ स्थायी करने तथा बचपन की देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) के लिए कानून बनाने की भी मांग की गई। प्रदर्शन में मनोज कुमारी, सीमा, समीम सैफी, संगीता, जयवंती, शशि प्रभा, मुनव्वर, मुहाजरीन आदि मौजूद रहे।