छापेमारी के दौरान लोगों को शांत कराता पुलिसकर्मी
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मुफ्ती सुहैल के करीबी रिश्तेदार उसके एकाकी जीवन से पशोपेश में हैं। खुद को पत्नी तक सीमित कर रखा था। रिश्तेदार और पड़ोसियों से किसी तरह का कोई मेल मिलाप नहीं था। यहां रहने के दौरान भी दुआ-सलाम कभी कभार होता था। हाल यह है कि किचन में पर्दा तक लगा रखा है। इसके चलते करीबियों को उसकी गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी नहीं हो सकी।
शहर के मुल्लाना मोहल्ला के मूल निवासी हफीज के बेटे सुहैल ने नवंबर 2018 से पैतृक मकान के एक हिस्से में रहना शुरू किया। बहू के आने के बाद इन लोगों ने आवभगत की। हालांकि कुछ दिन बाद सुहैल ने सबसे धीरे-धीरे दूरी बना ली। रिश्तेदार और पड़ोसियों से बीवी का पर्दा तक कराता था। उसकी बीवी भी परिवार की किसी महिला से मेलजोल नहीं रखती थी। करीबी रिश्ते के एक युवक ने बताया कि हम लोगों से किसी तरह का लगाव नहीं था।
दरअसल दिल्ली में रहने के दौरान उसके परिवार ने रिश्ता निभाने में गर्मजोशी नहीं रखी। ऐसे में हम लोगों ने शुरुआती दौर में मेलजोल की कोशिश तो की लेकिन उसके बाद हम लोग अपने कामों में व्यस्त हो गए। उसने बताया, सुहेल अपने कमरे में रहता था। सुबह में क्या नाश्ता बना। दोपहर में क्या बनना है। रात को कौन सा पकवान बनेगा। उसकी बीवी भी कभी साझा नहीं की। बकौल युवक, मैंने एक बार पूछा तो सुहैल ने बताया कि वह पर्दा करती है। इसके बाद हम लोगों ने कभी कुछ नहीं पूछा। जानने की उत्सुकता भी नहीं रही। हम लोगों ने भी दूरी बरकरार रखी। घर में कुछ खास पकवान बना तो, उनके पास भिजवा देते थे। घर से वह कब बाहर निकले। क्या करते हैं। किससे मिलते हैं, क्या बात करते हैं। इसके बारे में कभी साझा नहीं किए।