मुरादाबाद। बढ़ते शहरीकरण और घटती जोत के बीच लगाकर किसानों की संख्या कम हो रही है। किसान अपनी जमीन बेच रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन पर भी पड़ेगा। नई फार्मर रजिस्ट्री बनाने के कार्य के दौरान यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया है। पिछले पांच सालों में मुरादाबाद जिले के ग्रामीण इलाके में 6616 किसान भूमिहीन हो गए हैं, जो वर्ष 2019 में भूमिधर थे। दूसरी ओर फार्मर रजिस्ट्री बनाने के मामले में मुरादाबाद जिला 83.84 प्रतिशत आईडी बनाने के साथ प्रदेश में 14वें स्थान पर है। अभी भी यहां 25530 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होना शेष है।
शहरों के आसपास तो लंबे समय से आवासीय परियोजनाएं संचालित हो ही रही है, हाईवे व अन्य मुख्य मार्गो के किनारे तो ग्रामीण अंचलों में भी प्लॉटिंग हो रही है, जिसके कारण जोत घटती जा रही है। एमडीए हो आवास विकास अथवा बिल्डर। सभी की निगाहें किसानों की कृषि योग्य जमीन पर ही है। अधिकतर आवासीय परियोजनाएं इन्हीं जमीनों पर विकसित हो रही हैं। इसका सीधा प्रभाव खाद्यान्न उत्पादन पर दिखेगा।
उप कृषि निदेशक संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि किसानों की संख्या तो पिछले पांच सालों में घटी है। आंकड़े बताते हैं कि मुरादाबाद जिले में कुल 314859 किसानों में से 6616 किसान अब भूमिहीन हो चुके हैं, जबकि 2019 में यह सभी भूमिधर थे, यह किसान अब फार्मर रजिस्ट्री लायक ही नहीं रहे। इसके अलावा 6004 किसानों की पिछले पांच सालों में मृत्यु हो चुकी है। 2035 ऐसे किसान है, जिनके नाम, खतौनियां आदि मिसमैच हैं, जो तलाश करने पर भी नहीं मिल रहे हैं, जबकि 583 किसान ऐसे हैं, जिनकी जमीन में चकबंदी चल रही है। कुल मिलाकर 20538 किसान ऐसे हैं, जिनकी फॉर्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही है, जबकि प्रत्येक किसान की फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है।
प्रदेश में जिला 14वें स्थान पर
उप कृषि निदेशक संतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि 263986 से अधिक किसानों की फॉर्मर आईडी बन चुकी है, जो कुल किसानों की संख्या के सापेक्ष 83.84 प्रतिशत से अधिक है। इस हिसाब से पूरे प्रदेश में फार्मर आईडी बनाने के मामले में मुरादाबाद जिला 14वें स्थान पर है। अभी जिले में 25530 किसानों की फॉर्मर आईडी बनना शेष है।
अतिशीघ्र बनवाएं फार्मर रजिस्ट्री
उपनिदेशक (कृषि) ने बताया कि फार्मर आईडी आधारित योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था एक मई से लागू हो चुकी है। राज्य सरकार ने इसमें सिर्फ सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचते समय अनिवार्यता खत्म कर किसानों को तत्कालिक छूट दी थी लेकिन अन्य कोई छूट नहीं है। गन्ना बेचना हो या धान या फिर अन्य कोई फसल, खाद, बीज लेना हो या फिर कीटनाशक सभी के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य है। बिना फार्मर आईडी के कृषि विभाग की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, इसलिए अवशेष किसानों को अतिशीघ्र फार्मर रजिस्ट्री बनवा लेनी चाहिए।