मुरादाबाद। आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं और टीपीए की व्यावहारिक दिक्कतों पर शनिवार को पश्चिमी यूपी के अस्पताल संचालकों ने मंथन किया। दिल्ली रोड स्थित होटल हॉलिडे रीजेंसी में एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) के पश्चिम यूपी चैप्टर ने इस समिट का आयोजन किया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से निजी व सरकारी अस्पतालों के संचालकों ने भाग लिया और स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति पर गहन मंथन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ एएचपीआई के डायरेक्टर जनरल गिरधर ज्ञानी, पश्चिम यूपी चैप्टर अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, कोषाध्यक्ष डॉ. मगन मेहरोत्रा और संयुक्त सचिव डॉ. अंकुर गोयल ने किया। मुख्य अतिथि गिरधर ज्ञानी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में एक मरीज पर प्रतिदिन करीब 7,800 रुपये खर्च होते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च औसतन 9,000 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के साथ एक सांकेतिक बिल भी दिया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिक यह समझ सकें कि सरकार उनकी सेहत पर कितना निवेश कर रही है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सम्मान, विश्वास और जागरूकता बढ़ेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश चैप्टर अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आ रही दिक्कतों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि क्लेम और पैकेज को लेकर अस्पतालों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार समय पर क्लेम लगाने के बावजूद तीन महीने बाद क्लेम रिजेक्ट कर दिए जाते हैं, जिससे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति और मरीजों के इलाज की निरंतरता प्रभावित होती है। उन्होंने आयुष्मान से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर पैनल गठन की मांग की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनस फहीम ने किया। समिट में मुरादाबाद, बरेली, रामपुर, अमरोहा, संभल, बिजनौर, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) समेत आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अस्पताल संचालक शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. विनीत कुमार, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. सुनील दुप्ता, डॉ. सुनील कपूर आदि मौजूद रहे।