नोटबंदी, बैंक, करेंसी एक्सचेंज
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बैंकों के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के तीस दिन के भीतर बैंकों ने पब्लिक को तीन हजार करोड़ रुपये बांट दिए हैं। लेकिन इसके बावजूद पब्लिक की जेबें खाली हैं और बैंकों की कतारें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि पब्लिक के पास नहीं पहुंचे तो फिर ये नोट आखिर गए कहां?
दरअसल इस तीन हजार करोड़ रुपये की रकम से बड़ा हिस्सा अफसरों, नेताओं और फैक्ट्री - कारखाना मालिकों की जेबों में पहुंच गए हैं। नोटबंदी के बाद 10 नवंबर से नौ दिसंबर तक जनपद के लोगों ने पांच सौ और एक हजार के कुल नौ हजार करोड़ रुपये के पुराने नोट बैंकों में जमा किए हैं।
लेकिन इसके एवज में आरबीआई ने अभी तक जनपद की चार करेंसी चेस्टों को मात्र तीन हजार करोड़ के छोटे नोट दिए हैं। जबकि 600 करोड़ के नए दो हजार वाले नोट बैंकों को दिए गए हैं। नोट एक्सचेंज की तय समय सीमा में कुल 6 सौ करोड़ रुपये एक्सचेंज किए गए।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि जिस अनुपात में लोगों ने पैसे जमा किए, आरबीआई ने छोटे व नए नोट के तौर पर उसका पैंतीस प्रतिशत भी नहीं दिया है। यही कारण है कि बैंकों में कैश की कमी है। छोटे नोट के अभाव में बैंक कैशलेस होने लगे हैं।