अभिनेता सोनू सूद ने हितेश की मदद में कोई देरी नहीं की। रेनू के ट्वीट के बाद ही सोनू सूद की एनजीओ ने अपनी कवायद शुरू कर दी थी। सोनू सूद ने 16 घंटे बाद इंतजाम पूरे होने पर ट्वीट किया। ट्वीट करके एयर एंबुलेंस से हैदराबाद शिफ्ट कराने की बात कही। 79 घंटे बाद सोनू सूद ने हितेश को एयर लिफ्ट भी करा दिया।
कोरोना संक्रमित हितेश के फेफड़े खराब हो गए हैं। भाई के इलाज के लिए बहन रेखा और रेनू ने मुरादाबाद से नोएडा तक चक्कर लगाए। इस बीच भाई के इलाज का खर्च बढ़ता ही गया। माली हालात बिगड़ने लगी। इलाज के लिए लोगों से मदद की गुहार लगाई। इस दौरान डाक्टरों ने फेफड़े ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी। इसके बाद रेनू ने 11 जुलाई को अभिनेता सोनू सूद को ट्वीट किया। 16 घंटे बाद 12 जुलाई को सोनू सूद ने रेनू के ट्वीट का जवाब दिया। ट्वीट में सोनू ने बताया कि हितेश को एयर लिफ्ट कर हैदराबाद लाने के लिए एयर एंबुलेंस का बंदोबस्त कर दिया गया है। जल्द उसे हैदराबाद ले आएंगे। अपने ट्वीट के 79 घंटे बाद 15 जुलाई को सोनू ने एक और ट्वीट कर हितेश को सही सलामत हैदराबाद एयरलिफ्ट कराए जाने की बात बताई।
घटना क्रम
- 11 जुलाई को शाम 04 बजे रेनू ने सोनू सूद को ट्वीट किया
- 12 जुलाई की सुबह 8.14 बजे सोनू ने ट्वीट का जवाब दिया
- 15 जुलाई को दोपहर 3.17 बजे सोनू सूद ने एयर लिफ्ट पूरा होने की बात ट्वीटर पर शेयर की
सोनू ने हितेश को बताया फाइटर
हितेश शर्मा पिछले चार महीने से कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हैं। संक्रमण से दोनों फेफड़े खराब हो गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। चार महीने के इस संघर्ष के लिए सोनू सूद ने ट्वीट में हितेश को फाइटर बताया है।
कोरोना की मार से हितेश शर्मा का परिवार दो महीने में बिखर सा गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इससे हितेश का परिवार अभी उभर नहीं पाया है। पहले मां-बाप को गंवाया। अब खुद मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे हैं।
डा. रामस्वरूप कालोनी निवासी सुमन शर्मा के परिवार में अप्रैल से पहले खुशियां ही खुशियां थी। दोनों बेटों और बेटियों की शादी भी कर चुके थे। चारों अपनी गृहस्थी में खुश थे। बड़ी बेटी रेखा और रेनू दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती हैं। बड़ा बेटा हितेश मुरादाबाद तो छोटा बेटा अंकित गुड़गांव में रहता है।
हितेश दवा कंपनी में सेल्स हेड है। जबकि अंकित गुड़गांव में एक एमएनसी में क्षेत्र प्रबंधक (एएम) हैं। दूसरी लहर में लॉकडाउन होने पर अंकित परिवार के साथ मुरादाबाद आए थे। इस बीच अप्रैल में हितेश की तबीयत बिगड़ गई। जांच कराई तो वह संक्रमित पाए गए। इसके बाद मां-बाप और भाई भी संक्रमित हो गए। इस बीच छह मई को पिता और आठ मई को मां का निधन हो गया। दोनों के शव का अंतिम संस्कार रिश्तेदारों ने कराया। दोनों भाई अंतिम समय में मां-बाप को देख भी नहीं पाए। हितेश अब भी कोरोना से लड़ रहे हैं। दो महीने से परिवार परेशानियों से घिरा हुआ है।
हादसे में अंकित को गंवाने पड़े थे दोनों पैर
हितेश के छोटे भाई अंकित के दोनों पैर नहीं हैं। कुछ साल पहले अंकित हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हादसे में अंकित ने अपने दोनों पैर गंवा दिए।