मुरादाबाद। जिला प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई से आक्रोशित मंडी के कारोबारी शुक्रवार को मंडलभर के मंडी समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की कार्रवाई से मंडी आढ़तियों और किसानों के फल और सब्जियों को कुचलकर एक करोड़ की क्षति पहुंचाई है। इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जिला प्रशासन की कार्रवाई को लेकर फल सब्जी विक्रेता कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को मंडी परिसर में बैठक की। कारोबारियों ने तय किया कि शुक्रवार को अमरोहा, रामपुर, चांदपुर, हसनपुर, ठाकुरद्वारा, गजरौला आदि मंडियों के कारोबारी संगठन के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी। समिति के प्रवक्ता विनोद कुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मंडी में उस समय बुलडोजर चलाया जब कारोबार का समय था। बुलडोजर से फल और सब्जियों को कुचल दिया गया। सौ से अधिक अस्थायी दुकानें मनमानी ढंग से तोड़ दी गईं। किसी को अपना सामान उठाने का मौका तक नहीं दिया गया। इस मामले में किसानों और कारोबारियों की क्या गलती थी। मंडी में लाइसेंस लेकर आढ़ती कारोबार कर रहे हैं। कोई लाइसेंसी अवैध नहीं है। प्रशासन का आरोप गलत है। जिला प्रशासन ने शर्मनाक कार्रवाई की है। सुविधा के नाम पर मंडी शून्य है। व्यापारी अब जिला प्रशासन के तांडव को बर्दाश्त नहीं करेगा। हम जेल जाने के लिए तैयार हैं। इस दौरान महामंत्री राजकुमार सैनी, आढ़ती करनपाल सिंह, शिवराज, तीरथ सिंह सैनी आदि कारोबारी मौजूद रहे।
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डरे सहमे हैं किसान
फल सब्जी विक्रेता कल्याण समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि जिला प्रशासन की कार्रवाई से किसान भयभीत हो गए हैं। कोई मंडी नहीं आना चाहता है। उनको भय है कि प्रशासन कभी भी कार्रवाई कर सकता है। तीन माह पहले भी प्रशासन ने अतिक्रमण के नाम पर 75 दुकानों को नोटिस देकर तोड़ा था। सचिव के साथ हुई घटना के बाद प्रशासन ने बदले की भावना के साथ कार्रवाई की। इस मामले में व्यवसायियों की क्या गलती थी।
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नगर विधायक धरने पर बैठने के बाद हुई थी कार्रवाई
जिला प्रशासन की कार्रवाई रोकने और मंडी कारोबारियों की दुकानों की मरम्मत आदि मांगों को लेकर नगर विधायक रितेश गुप्ता ने धरना दिया था। तब भी जिला प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई की थी। इस मामले को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री अनिल कुमार ने डीएम को कार्रवाई रोकने और कारोबारियों की मांगों को पर विचार करने का निर्देश दिए थे।
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शिकायत के बावजूद मंडी में पेयजल और सफाई की व्यवस्था नहीं
समिति के प्रवक्ता विनोद कुमार शर्मा का आरोप है कि तीन साल से कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कारोबारियों और किसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था नहीं की। प्रदेश में मुरादाबाद मंडी सबसे गंदी मंडी के रूप में मानी जाती है। यहां चारों तरफ कीचड़ गंदगी है। रोड निर्माण के लिए शासन से करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए लेकिन कोई काम नहीं किया गया। पैसे की बंदरबांट की गई। इसी कारण सफाई व्यवस्था और पेयजल का इंतजाम ध्वस्त हो गया है। सवाल उठाया कि मंडी के अंदर और बाहर किस आदेश पर ठेला लगाए जा रहे हैं।
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25 प्रस्तावों में एक पर भी कार्रवाई नहीं
मंडी के कारोबारियों का कहना है कि जिला प्रशासन की तरफ से मंडी की व्यवस्था के लिए करीब 25 प्रस्ताव भेजे गए लेकिन एक पर भी कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में डीडी मंडी समिति अशोक कुमारी से पूछने पर सिर्फ आश्वासन ही मिला है।