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Moradabad News: राजेंद्र हत्याकांड में साक्ष्यों के अभाव में आरोपी भाई दोषमुक्त

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अमरोहा। आदमपुर थाना क्षेत्र के गांव भीमा सुल्तानपुर में वर्ष 2023 में हुए चर्चित राजेंद्र हत्याकांड में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी नरेश उर्फ नागेश को दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय की अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की सभी कड़ियां आपस में नहीं जुड़तीं और केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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घटना 27 अप्रैल 2023 की रात को हुई थी। गांव भीमा सुल्तानपुर निवासी किसान राजेंद्र फावड़े से गर्दन पर वार कर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक की पत्नी होशियारी देवी ने अपने देवर नरेश उर्फ नागेश और केशव के खिलाफ हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को घर के पास कूड़ी में छिपाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने नरेश उर्फ नागेश और केशव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। साथ ही विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी केशव की घटना के समय अन्य स्थान पर मौजूदगी सामने आने पर उसका नाम निकाल दिया था जबकि नरेश उर्फ नागेश के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने नौ गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने पाया कि मामला पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। मृतक की पत्नी और बेटी ने भी अदालत में बताया कि आरोपी से जमीन का कोई विवाद नहीं था, जिससे हत्या का उद्देश्य भी सिद्ध नहीं हो सका। इसके अलावा आरोपी की निशानदेही पर बरामद फावड़े और खुरपी की बरामदगी प्रक्रिया में भी कानूनी खामियां पाई गईं। फॉरेंसिक जांच में फावड़े पर मानव रक्त मिला, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि वह रक्त मृतक का ही था।
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आरोपी बरी, अब हत्यारा कौन?
अदालत के फैसले के बाद मामले में नए सवाल खड़े हो गए हैं। राजेंद्र की हत्या हुई, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए नरेश उर्फ नागेश को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। ऐसे में हत्या किसने की, यह सवाल अब भी अनुत्तरित है। शुरुआत में दो भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन विवेचना में एक का नाम हटा दिया गया और दूसरे को भी अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। इससे पुलिस की विवेचना की गुणवत्ता और वास्तविक आरोपी तक पहुंचने की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
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