करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के छह से अधिक मुकदमे दर्ज होने के बावजूद वो दो साल तक पुलिस को चकमा देता रहा। पुलिस की आंखों में धूल झाेंकने के लिए उसने रातोंरात परिवार समेत मुल्क भी छोड़ा लेकिन फिर छह माह बाद लौटकर पुलिसिया सेटिंग से सारे मामले निपटा भी लिए।
पर तकदीर उसे सलाखों तक घसीट ही ले गई। वो भी ऐसे मामले में जिसे पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर चुकी थी। लेकिन कोर्ट की सख्ती ने धोखाधड़ी के ‘मोस्ट वांटेड’ व्यापारी अभिषेक अग्रवाल का न केवल गणित बिगाड़कर रख दिया बल्कि उसे जेल की सलाखों तक भी पहुंचा दिया।
बैंकों और शहर की नजरों में डिफाल्टर व्यापारियों में शुमार अभिषेक अग्रवाल ने बैंकों और शहर के लोगों के कर्ज में दबने के बाद सितंबर 2015 में रातोंरात शहर छोड़ दिया था। अभिषेक परिवार समेत विदेश चला गया था।
इस बीच अभिषेक के खिलाफ शहर में मझोला और सिविल लाइंस थानों में धोखाधड़ी के छह से अधिक मुकदमे दर्ज हुए। लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं सकी थी। सिविल लाइंस थानाक्षेत्र के काजीपुरा निवासी मोहम्मद शमीम ने व्यापारी अभिषेक अग्रवाल निवासी मानसरोवर कालोनी के खिलाफ एक मार्च 2016 को सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी में केस दर्ज कराया था।
शमीम ने आरोप लगाया था कि अभिषेक अग्रवाल ने खुद को आरके बिल्डर्स का मालिक बताकर आशियाना कालोनी स्थित एक भूखंड उसे बेच दिया था। जिसका उसने पूरा पेमेंट अभिषेक को कर दिया था। लेकिन शमीम को बाद में जानकारी हुई थी कि अभिषेक ने इस भूखंड पर पहले से ही डेढ़ करोड़ रुपये का लोन बैंक से ले रखा था।
इसके अलावा भी कई लोगों ने अभिषेक के खिलाफ मझोला और सिविल लाइंस थाने में धोखाधड़ी के केस दर्ज कराए थे। लेकिन पुलिस अभिषेक को पकड़ नहीं सकी। पुलिस ने उसे भगौड़ा घोषित करके पकड़ने के कोशिशें शुरू कर दीं। बैंकों ने भगौड़ा घोषित करके अभिषेक की कोठी समेत दूसरी प्रापर्टी नीलाम करना शुरू कर दीं।
इस बीच फरवरी 2016 में अभिषेक अचानक शहर लौट आया। शहर में वापस आने के बाद उसने पुलिस से सेटिंग करके एक - एक कर मुकदमों को निपटाना शुरू कर दिया। तमाम संगीन धाराओं में मुकदमे होने के बावजूद पुलिस ने सांठगांठ करके अभिषेक को राहत देना शुरू कर दी।
पुलिसिया सेटिंग की बदौलत एक - एक कर उसके मुकदमों की फाइलें फाइनल रिपोर्ट के साथ बंद होने लगीं। शमीम की ओर से दर्ज कराए मुकदमे को भी पुलिस ने एफआर लगाकर खत्म कर दिया था। लेकिन शमीम ने कोर्ट में पुलिस की एफआर का विरोध किया।
जिस पर कोर्ट ने एफआर को खारिज करते हुए अभिषेक को पहले सम्मन जारी किया फिर उसके खिलाफ वारंट कर दिया। शनिवार को गैरजमानती वारंट लेकर अभिषेक के मधुबनी शोरूम पर पहुंची पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अभिषेक ऐसे वक्त में गिरफ्तार हुआ जब वह अपने सभी मुकदमों में एफआर लगवाकर पूरी तरह निश्चिंत हो चुका था।