मुरादाबाद। आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी के जरिए मरीजों के इलाज का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना मुरादाबाद में डेढ़ साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी है। जिले में 13.41 लाख से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं, लेकिन मरीजों की बीमारी, डॉक्टर की सलाह, दवाओं और जांच का रिकॉर्ड अब भी ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। जबकि कई अन्य जिलों में मरीजों का रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध है।
वहीं मुरादाबाद में न तो जिला अस्पताल की ओपीडी इस व्यवस्था से जुड़ सकी है और न ही किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर यह सिस्टम पूरी तरह लागू हो पाया है। परिणाम यह है कि लाखों आभा आईडी फिलहाल केवल एक पहचान संख्या बनकर रह गई हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि आभा आईडी से मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा, जिससे मरीज के भर्ती होने पर या ओपीडी में आने पर किसी भी सरकारी अस्पताल या एम्स में डॉक्टर पुरानी जांच, दवाओं और उपचार का रिकॉर्ड देख सकेंगे। लेकिन मुरादाबाद में मरीजों को इसका लाभ अभी नहीं मिल रहा। यहां आज भी इलाज का अधिकांश रिकॉर्ड कागजी फाइलों और पर्चों तक सीमित है। स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देशों के अनुसार ओपीडी, आईपीडी, फार्मेसी और पैथोलॉजी को डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड प्रणाली से जोड़ा जाना है। हालांकि जिला अस्पताल में अभी केवल पैथोलॉजी की जांच रिपोर्ट ही आभा आईडी से लिंक की जा रही है। ओपीडी, भर्ती वार्ड और दवा वितरण प्रणाली को इससे जोड़ने में अभी करीब छह महीने और लगने का अनुमान है।
ऑनलाइन नहीं बन रहा पर्चा, अब भी कतार में लग रहे मरीज
करीब आठ माह पहले जिला अस्पताल में मरीजों को कतार से बचाने के लिए नेक्स्ट जेन पोर्टल शुरू किया गया था। दावा था कि मरीज घर बैठ अपने मोबाइल या कंप्यूटर सिस्टम के जरिए ओपीडी के लिए पंजीकरण कर पाएंगे। प्रिंट आउट निकालने के बाद वह सीधे डॉक्टर के कक्ष में जाकर दिखा सकेंगे। जिला अस्पताल में रोजाना आने वाले 1500 से अधिक मरीज आज भी पर्चा बनवाने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं।
06 जुलाई 2026 तक मंडल में बनाई गईं आभा आईडी
जनपद कुल लक्ष्य बनी आईडी
रामपुर 24,03,541 17,50,651
अमरोहा 29,55,787 21,20,123
मुरादाबाद 19,48,659 13,41,333
संभल 22,43,106 15,38,101
बिजनौर 38,91,784 26,07,565
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वर्जन
जो जनपद यह व्यवस्था लागू कर चुके हैं, उनसे हम सीख रहे हैं। फीडबैक व डाटा के आधार पर हमने पैथोलॉजी को नई व्यवस्था से जोड़ दिया है। मरीजों की जांच रिपोर्ट आभा आईडी पर डाली जा रही है। जल्द ही हम ओपीडी, आईपीडी और फार्मेसी में इसे लागू करेंगे।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी