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Moradabad News: घुटना फटा, ताने सुने… फिर भी नहीं मानी हार, पारुल ने फिर बनाई टीम में जगह

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मुरादाबाद। कभी-कभी सपनों की सबसे ऊंची उड़ान उन्हीं के हिस्से में आती है जिनके पंख सबसे ज्यादा घायल हुए हों। शहर के कांशीराम नगर की पारुल सैनी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। चोट, ताने, अस्वीकार और ठोकरों से गुजरकर पारुल ने क्रिकेट के मैदान में फिर से एक उपलब्धि हासिल की है और चंडीगढ़ की अंडर-19 टीम में लगातार दूसरी बार जगह बनाई है। उनका चयन टीम में बतौर बॉलिंग ऑलराउंडर के रूप में हुआ है। पारुल रविवार को चंडीगढ़ की ओर से पहला मुकाबला बड़ोदरा के खिलाफ खेलेंगी।
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दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली पारुल सैनी ने क्रिकेट का सफर भाई को खेलते हुए देखकर शुरू किया था। छोटे भाई को एकेडमी छोड़ने जाने वाली पारुल ने जब वहां लड़कियों को भी खेलता हुआ देखा तो उन्हें भी खेलने का शौक पैदा हो गया। डॉक्टर पिता फूल सिंह सैनी चाहते थे कि बेटी पढ़ाई पर ध्यान दे लेकिन पारुल की नजरें किताब से ज्यादा मैदान पर टिकी रहीं। इसके बाद पारुल ने जिद कर ली कि वह क्रिकेट खेलेंगी। मजबूरन पिता ने दिल्ली रोड स्थित एमपीएस एकेडमी में उनका दाखिला कराया। इसके बाद भी घरवाले लगातार टोकते रहे कि पढ़ाई करो, क्रिकेट में कुछ भी नहीं रखा है।
पारुल बताती हैं कि मम्मी-पापा कहते थे कि पढ़ाई से कुछ बन जाओगी, खेलकर नहीं। लेकिन उन्होंने ठान लिया था कि वह क्रिकेट ही खेलेंगी। पड़ोसी और रिश्तेदार भी ताने देते थे। कहते थे लड़की होकर मैदान में क्या करेगी। पर उन्होंने सबको अनसुना कर दिया। अब वह क्रिकेट के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ना चाहती हैं। पिता का सबसे ज्यादा सपोर्ट उन्हें मिलता है और वह उसी सपोर्ट के दम पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
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पारुल का छोटा भाई चोट की वजह से क्रिकेट छोड़ चुका है। पारुल कहती हैं कि भाई का अधूरा सपना अब वह पूरा करेंगी। दो साल मुरादाबाद छोड़कर चंडीगढ़ में अभ्यास करना शुरू कर दिया। वह हर दिन नौ घंटे नेट पर पसीना बहा रही हैं। पीजी में रहकर पढ़ाई और अभ्यास दोनों को संभाल रही हैं। उनका कहना है कि वह लड़कों के साथ अभ्यास करती हैं ताकि गेंदबाजी में धार बनी रहे।
पारुल का कहना है कि उनका लक्ष्य बिल्कुल साफ है। उन्हें नीली जर्सी पहनकर टीम इंडिया के लिए खेलना है। अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है लेकिन परिवार वालों के सपोर्ट से यह लक्ष्य भी वह जरूर हासिल कर लेंगी। पिता फूल सिंह व मां कौशल्या का कहना है कि उनकी बेटी के जिद को जुनून में बदलता देख उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। वहीं कोच मिर्जा दानिश का कहना है कि पारुल ने लगातार मेहनत की है और इसी के दम पर उन्होंने चंडीगढ़ की टीम में जगह बनाई है। यह उनकी एकेडमी और शहर के लिए बड़ी उपलब्धि है।


- हादसे की वजह से क्रिकेट से हो गईं थी दूर
पारुल का चयन पिछले वर्ष भी चंडीगढ़ की अंडर-19 टीम में हुआ था। तब उन्होंने टी-20 क्रिकेट में शानदार खेल दिखाया था लेकिन वह वनडे क्रिकेट नहीं खेल पाई थी। एक हादसे ने उनका पूरा सत्र खराब कर दिया था। स्कूटी से एक्सीडेंट होने की वजह से उनका घुटना बुरी तरह जख्मी हो गया था जिसकी वजह से वह दो महीने तक बिस्तर पर रहीं। वनडे क्रिकेट न खेल पाने का उन्हें मलाल हुआ और उन्होंने क्रिकेट को छोड़ने का फैसला कर लिया। लेकिन पिता की प्रेरणा से उन्होंने एक बार और चांस लेने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने फिर से अंडर-19 टीम में जगह बनाने का लक्ष्य बनाया और अब वह एक बार फिर से टीम में चयनित कर ली गई हैं।
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