- लाइनपार के सात वार्डों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए नहीं कोई बड़ा सार्वजनिक पार्क, रामलीला मैदान ही सहारा
- लंबे समय से उठ रही है सार्वजनिक स्थल की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। शहर का लाइनपार इलाका आबादी के लिहाज से बड़ा हिस्सा है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए सुकून के कुछ पल बिताने की जगह नहीं है। करीब चार लाख की आबादी वाले लाइनपार के सात वार्डों—4, 12, 30, 37, 53, 57 और 59 में बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के टहलने और परिवारों के बैठने के लिए नगर निगम का कोई बड़ा सार्वजनिक पार्क नहीं है। नतीजा यह है कि रामलीला मैदान ही पूरे इलाके के लोगों का सबसे बड़ा खुला विकल्प बना हुआ है।
लाइनपार में प्रीतम नगर, जयंतीपुर, पुतलीघर, श्रीनगर, आजाद नगर, हरिहर कॉलोनी, चिड़िया टोला, मंडी समिति और आसपास की घनी बस्तियों में बड़ी आबादी रहती है। इन मोहल्लों में खाली जमीन लगातार कम हो रही है, लेकिन सार्वजनिक हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में तस्वीर इसके उलट है। रामलीला मैदान में भी नियमित रूप से खेल और सैर की सुविधा नहीं मिलती। यहां धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। हाल ही में मैदान में रामलीला की तैयारियां शुरू हुई हैं। ऐसे में इसे स्थायी पार्क का विकल्प भी नहीं माना जा सकता। नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर के दूसरे हिस्सों के पार्कों के रखरखाव पर लाखों रुपये के काम कराए जा रहे हैं। लाइनपार के लोगों का सवाल सीधा है कि जब आबादी इतनी बड़ी है तो बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक अदद पार्क कब मिलेगा। वर्तमान में वीकेएस स्कूल के पास स्थित नेताजी सुभाष पार्क में पिछले एक साल से सीएम ग्रिड प्रोजेक्ट की निर्माण सामग्री पड़ी है। इसके अलावा कुंदनपुर में एक छोटा सा पार्क है, जिसमें पशु बांधे जा रहे हैं। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि सीएम ग्रिड का काम खत्म होने के बाद नेताजी सुभाष पार्क को भी संवारा जाएगा। इसके अलावा लाइनपार के लोगों के लिए विकल्प तलाशा जाएगा।
लोगों के कोट्स (फोटो)
हमारे बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिलती। गलियों में वाहन चलते रहते हैं। रामलीला मैदान में भी हमेशा खेलना संभव नहीं है। नगर निगम को आबादी के हिसाब से कम से कम एक बड़ा पार्क विकसित करना चाहिए, जहां बच्चे खेल सकें और बुजुर्ग सुबह-शाम टहल सकें।
- अनुराग शर्मा
लाइनपार में लगातार मकान बन रहे हैं और आबादी बढ़ रही है, लेकिन खुले स्थान घटते जा रहे हैं। बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की बात होती है, लेकिन खेलने के लिए मैदान ही नहीं है। पार्क केवल सुविधा नहीं, शहर में रहने वाले लोगों की जरूरत है। नगर निगम को इस पर ध्यान देना चाहिए।
- हैदर अली अंसारी
सुबह टहलने के लिए लोगों को दूसरे इलाकों का रुख करना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह और मुश्किल है। रामलीला मैदान आयोजन के समय बंद हो जाता है। अगर नगर निगम जमीन तलाशकर पार्क विकसित करे तो हजारों परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
- अरविंद चौहान
लाइनपार में कई मोहल्ले बहुत घने हैं। घरों के आसपास खुली जगह नहीं बची है। बच्चों के खेलने के लिए सड़क या गलियों का सहारा लेना पड़ता है। इससे हादसे का खतरा रहता है। इतनी बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में कम से कम एक व्यवस्थित पार्क होना चाहिए।
- छत्रपाल
नगर निगम दूसरे क्षेत्रों के पार्कों में झूले और ओपन जिम लगवा रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन लाइनपार की जरूरत भी देखनी चाहिए। यहां भी खाली सरकारी जमीन चिन्हित कर पार्क बनाया जा सकता है। आबादी के अनुपात में हरित क्षेत्र बढ़ाना जरूरी है।
- अरविंद चौधरी
रामलीला मैदान हमारे लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे स्थायी पार्क का विकल्प नहीं कहा जा सकता। यहां सालभर एक जैसी गतिविधि नहीं होती। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए अलग सुविधाओं वाला पार्क चाहिए। नगर निगम को सातों वार्डों की जरूरत का सर्वे कराना चाहिए।
- राजेश शर्मा