मुरादाबाद। ...अली के खून का जलवा दिखा गए अब्बास, यजीदियत को तमाशा बना गए अब्बास।...अब्बास ये एहसास न छोड़ेगा मेरा साथ, कटते न तेरे हाथ तो बनते न मेरे हाथ। दर्द भरे इन नौहों की लाइनों को सुनकर अजादार अपनी आंखों से आंसू रोक नहीं पाए। लाकड़ीवालान में निकाले गए अलम और जुलजुनाह के जुलूस में मातमी अंजुमनों ने देर रात तक सीनाजनी कर शोहदा ए करबला को खिराजे अकीदत पेश किया।
अंजुमन असगरी की ओर से सोमवार को मातमी शब बेदारी का आयोजन किया गया। मशकूरुल हसन नकवी के मकान पर इशा की नमाज के बाद मजलिस ए अजा हुई। इसमें मौलाना ने करबला में हक के लिए दी गई इमाम हुसैन की शहादत और इस पैगाम को आगे बढ़ाने में उनकी बहन जनाबे जैनब और बेटे चौथे इमाम हजरत जैनुल आबेदीन की कोशिशों पर रोशनी डाली। मजलिस के बाद अलम के साए में नौहों और मातम के साथ शब बेदारी की गई। रात तीन बजे तक यह सिलसिला जारी रहा। मेजबान अंजुमन के साथ ही स्थानीय अंजुमन जीनत ए अजा और बरेली के सेंथल से आई अंजुमन पंजेतनी, मुजफ्फरनगर के मेमन से आई अंजुमन शैदा ए इस्लाम और सिरसी से आई अंजुमन गुंचा ए इस्लाम के नौहाख्वां ने दर्दनाक आवाज में जिक्र ए कर्बला कर हर आंख को नम कर दिया।
इस दौरान पयाम हसनैन, सुहैल अहमद रिजवी, मोहम्मद अब्बास, मेहजर अब्बास, नसीम हैदर, जावेद यावर, शहनवाज सिब्तैन, आसिम यावर, कौसर अली, अरमान नकवी, जमीर बाकरी, नवाब हैदर अली, मोहम्मद आलम, जहीर अब्बास नकवी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।