मुरादाबाद। जिले भर के शिक्षकों ने एकजुट होकर सोमवार को अपनी ताकत का एहसास कराया। शिक्षकों का कहना था कि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। शिक्षक हक हासिल करने के लिए आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं। सरकार को उनकी मांगे पूरी करनी ही हाेंगी। अब भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका परिणाम भुगतने को तैयार रहना होगा।
अंबेडकर पार्क में शिक्षक महासंघ के बैनर तले हुई शिक्षक महासभा में वक्ताओं ने कड़े तेवर दिखाए। इसके बाद अंबेडकर पार्क से कलेक्ट्रेट तक शिक्षकों ने भारी तादाद में जुटकर एकजुटता दिखाई। सभा के बाद कलेक्ट्रेट जाकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। प्रदेश के शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर समय समय पर आंदोलन करते रहे हैं। इसके लिए प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल, माध्यमिक, राजकीय शिक्षक संघों ने अलग अलग धरना प्रदर्शन किया। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन उनकी मांगें पूरी नहीं हुई। जिसे देखते हुए इस बार सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगे पूरी करने के लिए आंदोलन की रणनीति तैयार की। जिसके तहत दो दिसंबर से आठ दिसंबर तक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई संदेश नहीं मिलने पर नौ दिसंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। सभी संघों के पदाधिकारियों ने मांगे पूरी नहीं होेने पर आरपार की लड़ाई की चेतावनी दे डाली। 18 दिसंबर को लखनऊ में होने वाली महारैली में शामिल होेने का आह्वान किया। शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष सर्वेश शर्मा और संयोजक रविदत्त शर्मा रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जगत नारायण शर्मा ने और संचालन सुनीति गिरि ने किया। माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडल मंत्री डा. देवेंद्र सिंह, राजकीय शिक्षक संघ के अजमत अली, अरबी फारसी मदरसा संघ से मौलाना असजद, मौलान उबैद, माध्यमिक संस्कृत शिक्षक कल्याण समिति के शिवशंकर चतुर्वेदी, सीनियर बेसिक शिक्षक संघ से अकीलुर्रहमान, प्राथमिक शिक्षक संघ से महेंद्र सिंह, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से ब्रह्म सिंह, चंद्रभान सिंह ने सभा को संबोधित किया।
शिक्षकों की प्रमुख मांगे
- बेसिक के शिक्षकों का ग्रेड वेतन 4600-4800 और न्यूनतम मूल वेतन 17140-18150 किया जाए।
- मृतक आश्रिताें को पूर्व की भांति न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के आधार पर अध्यापक की नौकरी दी जाए।
- एक अप्रैल 2005 और उसके बाद नियुक्त हुए शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया मिले।
- उर्दू अध्यापकों अप्रशिक्षित को पांच वर्ष की सेवा के पश्चात वरिष्ठता सूची में शामिल किया जाए।
- माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को विनियमितीकरण किया जाए।
- सीटी से प्रोन्नत शिक्षकों को सीटी की सेवाओं का लाभ।
- एलटी वेतनमान के शिक्षकों को प्रोन्नत वेतनमान हेतु स्नाकोत्तर उपाधि की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
- वित्त विहीन विद्यालयों के अंशकालिक शिक्षकों को पूर्णकालिक बनाने के लिए अंशकालिक मान्यताओं को हटाया जाए।
- राजकीय शिक्षकों का प्रोन्नति कोटा पूरा किया जाए।
- शिक्षकों को एसीपी का लाभ दिया जाए।
- वरिष्ठता सूची अतिशीघ्र प्रकाशित की जाए।
- अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शिक्षकों को राज्य सरकार की ओर से सहायता प्राप्त अन्य विभागों के समान समाज कल्याण विभाग के समान अनुदानित प्राथमिक विद्यालयाें के शिक्षकों को पेंशन, पारिवारिक पेंशन की सुविधा दी जाए।
- सीनियर बेसिक शिक्षकों को समस्त स्थायी मान्यता प्राप्त असहायिक जूनियर हाईस्कूलों को वेतन वितरण में अधिनियम 1978 के अंतर्गत अनुदान सूची में लिया जाए।
- संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षकों के माध्यम की भांति एक जनवरी 1996 से पंचम वेतन आयोग की स्वीकृति दी जाए।
- संस्कृत विद्यालयों में शिक्षण शुल्क समाप्त किया जाए।
- अरबी फारसी मदरसों में कार्यरत शिक्षकों को मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम के अंतर्गत विनियमावली निर्मित की जाए।
- मदरसा बोर्ड के नए पाठ्यक्रम के अनुसार नवीन विस्तृत पाठ्यक्रम, विषय अध्यापक एवं पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- महाविद्यालयों के शिक्षकों ने यूजीसी नियमन 2010 शीघ्र प्रख्यापित किया जाए।