मुरादाबाद। जमीनों के फर्जी कागजात बनवाकर मूंढापांडे के 20 किसानों ने यूनियन बैंक को करीब दो करोड़ रुपये की चपत लगा दी। कागजात इस तरह से तैयार कराए गए थे कि उन्हें एक्सपर्ट भी नहीं पकड़ पाए। अब जब यह पूरा ‘खेल’ पकड़ में आया तो हड़कंप मच गया। मुकदमा दर्ज कराया गया। उस कारोबारी के नाम भी रिपोर्ट हुई जो गारंटर बना था।
यूनियन बैंक में लोन का ‘खेल’ पिछले साल हुआ था। बैंक की बुधबाजार शाखा ने 26 दिसंबर को लोन देने की प्रक्रिया शुरू की। यूनियन बैंक की बुधबाजार शाखा से ऋण लेने के लिए मूंढापांडे के बीस किसानों ने अर्जी दी थी। गोविंदनगर सरस्वती विहार के रहने वाले जसपाल चौहान पुत्र मित्रपाल इनके गारंटर बने। दरअसल जसपाल का पहले से बैंक में करेंट एकाउंट था। खैर कागजात पूरा कराने के बाद लोन संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं। किसानों ने जो कागजात दाखिल किए थे उसमें 20 एकड़ भूमि दर्शायी गई। बैंक ने चार जुलाई तक सभी को लोन जारी कर दिया। करीब 1.84 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। एक सप्ताह पूर्व प्रथमा बैंक देवापुर के मैनेजर से बातचीत के दौरान बैंक अधिकारियों को पता लगा कि मूंढापांडे में 12 एकड़ से ज्यादा किसी भी किसान के पास जमीन नहीं है। लिहाजा बैंक अधिकारियों ने दोबारा किसानों के कागजातों की जांच कराई। तब अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जमीन के सभी कागजात फर्जी निकले। सरकारी रिकार्ड में दर्ज जमीनों के दस्तावेजों में काफी अंतर है। बैंक मैनेजर गुरमीत सिंह ने कोतवाली में कारोबारी समेत 20 लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया।
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इन पर मुकदमा
कटघर गोविंदनगर के जसपाल चौहान पुत्र मित्रपाल, विसाहट जैतपुरा के कृष्णपाल पुत्र नत्थू, ऋषिपाल, पप्पू सिंह, राकेश, उमेश सिंह, अहरौला के नरेशपाल, उमेश, सुरेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, रमेशपाल पुत्र लक्ष्मण, नब्बा नगला गांव के जगदीश सिंह, गजेंद्र सिंह, ब्रजेश, रामू, गदई खेड़ा निवासी संजू पुत्र रोशन, रनियाठेर के गुड्डू व कपूर और घौंडा गांव कृष्णपाल व रमेशपाल सिंह का नाम शामिल है।
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पिछले दिनों प्रथमा बैंक देवापुर शाखा के प्रबंधक ने बताया कि मूंढापांडे में 12.5 एकड़ के बाद की जमीन सीलिंग है। लेकिन किसानों ने अपने जमीन के कागजात करीब 20 एकड़ के लगाए थे। तब संदेह हुआ। सरकारी रिकार्ड दिखवाए गए तो पता लगा कि किसानों ने जो कागजात लगाए वह फर्जी हैं। मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। -- गुरमीत सिंह, शाखा प्रबंधक
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