मुरादाबाद। गम्मनपुरा के चार दलित किसानों की हत्या के मामले में प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री, डीआईजी, एसएसपी मुरादाबाद और डीएम संभल की पेशी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग में हुई। आयोग के चेयरमैन द्वारा पूछे गए छह सवालों के जवाब में अफसर उलझ गए थे। कई सवालों का जवाब तो दे ही नहीं पाए। आयोग के चेयरमैन ने नामजद अभियुक्त अनीस की गिरफ्तारी में होने वाली देरी पर सख्त नाराजगी जताई।
गम्मनपुरा कांड दिल्ली से लखनऊ तक गूंजा था। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की टीम ने भी गांव का दौरा किया था। पूरी रिपोर्ट आयोग के चेयरमैन पीएल पूनिया को सौंपी गई। आठ मई को आयोग के अध्यक्ष पीएल पूनिया ने गम्मनपुरा का दौरा किया था। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत के बाद माना था कि इस पूरे प्रकरण में पुलिस की लापरवाही रही। गांव वाले चीख चीखकर अभियुक्त का नाम लेते रहे मगर पुलिस खामोशी अख्तियार किए रही। आयोग ने प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग, डीआईजी अमरेंद्र कुमार सेंगर, एसएसपी नीलाब्जा चौधरी और जिलाधिकारी संभल लाल बिहारी पांडेय को तलब किया था। सोमवार को यह अधिकारी आयोग के चेयरमैन के समक्ष पेश हुए।
राष्ट्रीय एससी/एसटी आयोग में पूछे गए सवाल
1- चार किसानों के कत्ल के खुलासे में इतनी देरी क्यों की गई
2- जब गांव वाले अभियुक्त का नाम ले रहे थे तो उसे पकड़ा क्यों नहीं गया
3- अनीस की गिरफ्तारी के स्थान को लेकर भी उठाए गए सवाल
4- आर्थिक मदद देने में इतना विलंब क्यों किया जा रहा है
5- पुलिस की सुस्ती मानी गई तो कार्रवाई क्या की गई
6- आला अफसरों ने गांव का दौरा क्यों नहीं किया