मुरादाबाद। मुहर्रम की चौथी तारीख को अजाखानों में उलमा ने मजलिस पढ़ी। उन्होंने फरमाया कि इमाम हुसैन ने शहादत देकर इस्लाम की हिफाजत की। उनकी कुरबानी की वजह से दुनिया में इस्लाम जिंदा है।
मुहर्रम की सोमवार को चार तारीख थी। सुबह इमामबाड़ा अली यावर नकवी में मौलाना मुजफ्फर सुल्तान तौराबी ने मजलिस में कहा कि इमाम हुसैन ने करबला की जंग इस्लाम की खातिर लड़ी। यही वजह है दुनिया के हर मुसलमान हुसैन की शहादत को याद कर गम में डूब जाता है। लाकड़ीवालान में अली हैदर जानी के इमामबाड़ा पर महिलाओं की मजलिस में भी दास्तान-ए-करबला बयान की गई। शाम को इमामबाड़ा मीर सआदत अली चौमुखापुल पर मौलाना मंसूर आबदी ने मजलिस पढ़ी। रात को इमामबाड़ा फरजंद अली लाकड़ीवालान और इमामबाड़ा कुली खां चौकी हसन खां में मौलाना मुशीर हसन सिरस्वी ने करबला का वाकिया बयान किया। इसके साथ ही अजादारों ने नोहाख्वानी के साथ मातम किया।