कांठ(मुरादाबाद)। ना रोक पाई कोई दीवार और न ही कोई बाधा अवरोध बन पाई। जब कुछ करने का हौंसला और जज्वा हो तो राह में बिखरे शूल भी फूल के समान नरम हो जाते हैं। ऐसा सोमवार को कांठ के मतलबपुर फायरिंग रेंज पर आयोजित की जा रही पांच दिवसीय 16 वीं अंतर वाहिनी पीएसी पश्चिमी जोन एलार्म इफिलियेंसी एवं रायफल, रिवाल्वर, पिस्टल, सेंटर फायर पिस्टल, बिग वोर प्रौन कार्वाइन एवं शूटिंग प्रतियोगता के पहले दिन जावाज पीएसी के जवानों ने कर दिखाया।
प्रतियोगिता का शुभारंभ 23/24 वाहिनी पीएसी मुरादाबाद के सेनानायक अशोक कुमार टण्डन ने किया। फीता काट कर प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। सबसे पहले एलार्म एफिसियेन्सी रेस प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें मेजवान 23 वीं वाहिनी की टीम दुश्मन पर फतह करने के लिए पूरे जोशो खरोश के साथ तैयार होकर रवाना होती है। राह में पड़ने वाली करीब 14 फिट ऊंची दीवार को जवानों ने ऐसे पार कर दिया जैसे वह कोई मामूली सी दीवार हो। इसके बाद पानी से भरी खाई को रस्से के सहारे पार कर दिया। मेजवान वाहिनी की टीम ने निर्धारित 220 अंक के सापेक्ष 218 प्राप्त कर प्रथम स्थान पाया। जबकि 06 वीं वाहिनी आरआरएफ मेरठ की टीम 151 अंक लेकर दूसरे तथा 15 वीं वाहिनी पीएसी आगरा की टीम 125.40 अंक लेकर तीसरे स्थान पर रही।
एसाल्ट प्रतियोगिता के उपरांत रायफल पुरानी स्पर्धा प्रतियोगिता आयोजित कराई गई। लेकिन देर शाम तक प्रतिभागी टीमें प्रतियोगिता पूर्ण न होने के कारण किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। प्रतियोगिता के शुभारंभ के अवसर पर 23 वीं बाहिनी के उपसेनानायक अगमोहन शर्मा, उप सेनानायक 24 वीं वाहिनी मुरादाबाद के उप सेनानायक राजेश कृष्ण, सहायक सेनानायक 24 वीं वाहिनी डीके कैन, 09 वीं वाहिनी पीएसी मुरादाबाद के शिविर पाल अजय कुमार, 23 वीं वाहिनी के शिविरपाल सुरेश कुमार तथा सुरेश कुमार रवि, पीटीसी मुरादाबाद के प्रतिसार निरीक्षक मनोज कुमार विष्ट, 23 वीं वाहिनी मुरादाबाद के सूबेदार सैन्य सहायक वीरपाल सिंह, 23 वीं वाहिनी के गुल्फनायक लक्ष्मण सिंह, पीटीसी मुरादाबाद के मु.आ. आईटीआई बिजेंद्र राणा, 09वीं वाहिनी के नायक नीरज कुमार आदि मौजूद रहे। प्रथम दिन की प्रतियोगिता के आयोजन में प्रतिसार निरीक्षक मनोज कुमार विष्ट, बिजेंद्र राणा और नायक नीरज कुमार की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही।
जान हथेली पर रख टारगेट के नीचे बैठता है स्टाफ
कांठ। सोमवार को भीषण गर्मी और चल रही तपती तेज पछुवा हवा ने पीएसी जवानों की चल रही प्रतियोगिता को काफी प्रभावित किया। लेकिन अनुशासन और बुलंद इरादे के सामने तपती लू भी इरादे को डगमगा नहीं पाई। फयरिंग के दौरान टारगेट के नीचे बैठने वाला स्टाफ अपनी जान को हथेली पर रखकर बैठता है। निर्धारित दूरी से निर्धारित राउंड चलाने के बाद टारगेट के नीचे बैठा स्टाफ एक प्रकार के भालेनुमा तीर से टारगेट पर पड़ने वाली गोली के बारे में बताता है। निशाना लगा रहा जवान उस फायर में रह गई कमी को अगले राउंड में दुरूस्त करता है। निशानेबाजी का यह कौशल हर कोई पूरा नहीं कर पाता। जरा सी चूक किसी की जान को पलक झपकते ही ले सकती है। लेकिन कुशल नेतृत्व और सही टाइमिंग प्रतियोगिता को पूरी तरह से सफल कराने के लिए एक वरदान से कम नहीं है।