मुरादाबाद। कोर्ट गलियारे से निकलकर एक बार फिर से एडवांस लाइसेंस का मसला शुक्रवार को डीजीएफटी दफ्तर में जबर्दस्त तरीके से गूंजा। सरकार की नजरों में लंबे समय से आरोपी चल रहे एडवांस लाइसेंस के धारकों को माफी स्कीम लाकर माफ करने की मांग एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने एडिशनल डायरेक्टर आई ए एस सुमित जयरथ से की है। जयरथ शुक्रवार को पीतल नगरी स्थित दफ्तर आए हुए थे।
दरअसल डीजीएफटी की ओर से 90 के दशक में बड़ी संख्या में पीतल नगरी के निर्यातकों को एडवांस लाइसेंस दिया गया था। लेकिन उनमें से कई निर्यातक सरकार की आयात - निर्यात शर्तों को पूरा नहीं कर पाए थे। जिसकी वजह से सरकार को इस मद में करोड़ों रुपयों का चूना एक ही झटके में लगा था। इस पर सीबीआई जांच भी बैठी थी। सीबीआई के सक्रिय होते ही कई निर्यातक शहर छोड़ गए, तो कुछ कोर्ट की शरण में चले गए। बहरहाल मामला कोर्ट में चल रहा है। शहर छोड़ने वाले अब भी फरारी की जिंदगी काट रहे हैं। यह मामला तो ड्यूटी के 200 करोड़ रुपये अदा करने का है। बताय जाता है कि वह राशि अब ब्याज और पेनाल्टी समेत लगभग चार गुना बढ़ चुकी है। जिससे आरोपी अब देने में सक्षम नहीं है। मसले को निपटाने के लिए एक्सपोर्ट एसोसिएशन के सचिव सतपाल ने डीजीएफटी कार्यालय में जयरथ से भेंट की। उन्होंने कहा कि एडवांस लाइसेंस के आरोपी सरकार को धन लौटाने के मूड में हैं। पर उनकी माली हालत इतनी मजबूत नहीं है कि वे सारी राशि लौटा सकें। सरकार यदि एमनेस्टी (माफी) स्कीम लाकर उन्हें माफ करती है तो यह काम दोनों के हित में सरल हो जाएगा। इस पर जयरथ ने आश्वासन दिया कि एसोसिएशन की इस मांग को मंत्रालय तक पहुंचाया जाएगा। मंत्रालय को उचित लगा तो एमनेस्टी स्कीम लागू किया जाएगा।