मुरादाबाद। आप ब्रंाडेड कंपनियों के नाम का जो महंगा सामान लेते हैं वह वाकई में ब्रांडेड नहीं बल्कि, चाइनीज भी हो सकता है। लोग ब्रांडेड सामान खरीदने के नाम पर धोखा खा रहे हैं। ब्रांडेड कंपनी डिब्बों में चाइनीज आइटम ही होता है। लिहाजा, चाइना का जो सामान दो से तीन सौ रुपये में मिलता है, वहीं सामान सिर्फ ब्रांडेड कंपनियों का मोहर लगाकर दो-ढ़ाई हजार रुपये तक में बेचा जाता है। इस तरह से ब्रांडेड कंपनियां सिर्फ अपने ब्रांड का सील लगाकर आपकी जेेब पर डाका डाल रही हैं और आप इस बात से खुश होते हैं तथा समाज में अपना स्टेट्स सिंबल बनाते हैं कि फलां कंपनी का सामान खरीदे हैं। बाजार में इस समय चाइनीज इलेक्ट्रानिक सामानाें की धूम तो है और अब चाइनीज जूता, चप्पल, सैंडिल तक बाजार में उपलब्ध है।
गौरतलब है कि चीन इलेक्ट्रानिक सामानों और फिर मोबाइल फोन लेकर भारतीय बाजार में कूदा। फिर धीरे-धीरे और भी सामना लेकर आया। अपना ब्रांडेड नाम देकर गैस गीजर बेचने वाली कंपनियां चीन से ही सामना मंगवाकर उसे केवल अपने यहां असेंबल करके बेचती है अथवा चीन से ही अपने ब्रांड का सील लगवाकर मंगवा लेती है। लोग खुश होते हैं कि ब्रांडेड सामान उनके घर में है और यहीं वे धोखा खा रहे हैं।
शूज विक्रेता पवन अग्रवाल ने बताया कि शूज बाजार में कोलंबस, रोनाल्डो और वीयरलैंड नाम की ब्रांडेड कंपनियां बाजार में हैं। लेकिन, ये सभी चीन से ही अपर व सोल यहां तक कि जूतों के फीते तक मंगवा लेती हैं। फिर यहीं भारत में ही असेंबल कर उसे अपने ब्रांड का सील लगाकर बेचती है और चाइनीज जूतों से दस गुना रेट पर। लिहाजा, जो सामान दो सौ रुपये का होता है उसे यही कंपनियां दो हजार से भी अधिक में बेच कर मोटी कमाई करती हैं। बेवकूफ बनता है ग्राहक, जबकि यही जूता कंप्लीट होकर चीन से आता है तो फिर उसका रेट काफी कम होता है। इसलिए यदि आपको पता नहीं है तो फिर आप बाजार में धोखा खा रहे हैं।
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