शारदा अभियान में मुरादाबाद जिले में ब्लाकवार ड्राप आउट और आउट आफ बच्चों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चिह्नित बच्चों को नजदीकी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा। अभियान दो चरणों में चलाया जाएगा। इसमें 15 फीसदी नामांकन का लक्ष्य पूरा करने वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
जनसंख्या के अनुपात में सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या नहीं बढ़ रही है। कक्षा 5वीं के बाद हर साल कक्षा छठी में छात्र संख्या गिर रही है। सरकारी स्कूलों में शैक्षिक सुधार के साथ बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए प्रदेश सरकार कई योजनाएं भी चला रही है। इन्हीं योजनाओं में निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत छह से 14 साल की उम्र के आउट आफ स्कूल और ड्राप आउट बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है। एक फरवरी से अभियान का पहला चरण शुरू हो चुका है। 30 मार्च तक बच्चों को खोजा जाना है। 20 अप्रैल तक चिह्नित बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला होना है।
दूसरा चरण 21 मई से शुरू होकर 30 जून तक चलना है। 20 जुलाई तक चिह्नित बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाना है। शारदा अभियान में जिले के सभी ब्लाकों के प्रभारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ब्लाक स्तर पर बच्चों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अपर मुख्य सचिव ने ब्लाक स्तर पर 15 फीसदी नामांकन बढ़ाने वाले सर्वश्रेष्ठ प्रधानाध्यापक पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसमें जिला स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी को पुरस्कृत किया जाना है। अभियान में जिलेवार, मंडलवार और राज्यवार समीक्षा की जाएगी।
चिह्नित बच्चों के स्कूल नहीं आने की वजह का चलेगा पता
अभियान में विद्यालय नहीं आने वाले बच्चों की वजह भी जानी चाहिए। इसका प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें 18 बिंदु हैं। चिह्नित बच्चे के परिवारजनों से वजह जानने के बाद संबंधित बिंदु पर पूरा उल्लेख किया जाएगा। इससे आउट आफ स्कूल और ड्राप आउट बच्चों की समस्या सामने आ पाएगी।
दिव्यांगता वाले बच्चे भी होंगे चिह्नित
दिव्यांगता के चलते स्कूल नहीं आने वाले बच्चों को भी चिह्नित किया जाएगा। परिषद से जारी छह बिंदुओं के प्रारूप में टीमों को दिव्यांगता का उल्लेख करना होगा। ऐसे बच्चों की सूची मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को भी सौंपी जाएगी।