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ईरान से अब रुपये में भी कारोबार नहीं कर सकेंगे निर्यातक

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मुरादाबाद।
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पांच नवंबर से ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंध और भी कड़े हो जाएंगे। ईरान के साथ डॉलर में कारोबार करने पर पहले से ही रोक है। अब पांच नवंबर के बाद निर्यातक रुपये में भी ईरान से कारोबार नहीं कर सकेंगे। इसका सीधा असर मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग पर पड़ेगा। महानगर की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री को करीब 500 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान है। बदले हालात में ईरान के थोक खरीददारों ने ऑटम फेयर में आने से भी मना कर दिया है।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने ईरान पर लंबे समय से प्रतिबंध लगा रखे हैं। बीच में संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधों को हटा लिया था, लेकिन अमेरिका की ओर से प्रतिबंध जारी रहने की वजह से बाकी देशों के ईरान के साथ डॉलर में कारोबार पर रोक लगी थी। बीच का रास्ता निकालते हुुए मुरादाबाद के निर्यातक ईरान के साथ थर्ड पार्टी डॉलर भुगतान पर निर्यातक कर रहे थे। किसी तीसरे देश के जरिए ईरान के थोक खरीददार मुरादाबाद के निर्यातकों को डॉलर में भुगतान करते आ रहे थे। लेकिन इसका खुलासा होने पर आरबीआई ने ऐसे सभी निर्यातकों के बैंक रिलाइजेशन सर्टिफिकेट (बीआरसी) जारी करने से इंकार कर दिया था। प्रतिबंधों की वजह से ईरानी मुद्रा रियाल में तेजी से आई गिरावट की वजह से ईरान से 1100 हस्तशिल्प उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी थी। इनमें मुरादाबाद से एक्सपोर्ट होने वाले हस्तशिल्प उत्पाद भी शामिल हैं। जिसकी वजह से मुरादाबाद से भेजे गए कंटेनर ईरान में पोर्ट पर रोक दिए गए थे। एक सप्ताह पहले ही ईरान ने इन कंटेनरों को रिलीज कर निर्यातकों और ईरानी थोक खरीददारों को थोड़ी राहत दी थी। अब पांच नवंबर से नए प्रतिबंधों का सामना करने जा रहे ईरान के साथ रुपये में भी निर्यातकों के कारोबार करने पर रोक लग जाएगी। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व सचिव सतपाल का कहना है कि मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को कम से कम 500 करोड़ रुपये का नुकसान तय है। जब कभी यह प्रतिबंध हटेंगे भी तो रुपये में ही कारोबार हो सकेगा।
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ईरान पर अमेरिका की ओर से नए प्रतिबंध लगने से हस्तशिल्प उद्योग को बड़ा नुकसान होगा। रुपये में भी कारोबार बंद हो जाने की वजह से निर्यात बंद हो जाएगा। सिर्फ हस्तशिल्प निर्यात ही नहीं बल्कि तेल की कीमतों के साथ ही पूरे बाजार पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। पूरे घटनाक्रम पर मंत्रालय के लगातार संपर्क में हैं। - राकेश कुमार, कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच।
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