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गिरने के कगार पर हैं जर्जर कांशीराम आवास

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मुरादाबाद।
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पचास साल तक मजबूत और टिकाऊ रहने का दावा करने वाले कांशीराम आवास की हालत एक दशक में ही जर्जर हो गई है। लगातार पानी टपकने और सीलन के कारण ये भवन गिरने के कगार पर है। कई डरे सहमे परिवार इन भवनों को खाली कर चले गए हैं, जबकि काफी हादसे के साए में रहने को मजबूर हैं। लगातार शिकायत के बावजूद किसी अफसर ने इन भवनों की सुध लेनी जरूरी नहीं समझी है। तीन मंजिला भवनों में ऊपर से नीचे तक सभी में पानी टपक रहा है। कांशीराम आवासों में डाली गई पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो गई है।
प्रदेश की बसपा सरकार की प्राथमिकता वाले कांशीराम आवासों को बनाते समय गुणवत्ता का दावा किया गया था। इन भवनों के पचास साल तक मजबूत और टिकाऊ रहने का भरोसा भी दिया गया । इसके बावजूद ये भवन पांच साल भी ठीक नहीं रहे। वर्ष 2012-13 से ही इनमें पानी टपकना शुरू हो गया। बरसात में ही नहीं, पूरे साल हर मौसम में इनमें पानी टपकता है। कांशीराम आवासों में लगाई गई पाइपलाइन छतों और दीवारों में जगह-जगह से लीक हो गईं हैं। इनसे रिसने वाला पानी छतों और दीवारों से होकर पूरे भवन में फैल गया है। यह किसी एक सेक्टर का हाल नहीं है। कांशीराम आवास के सभी सेक्टर की हालत एक जैसी है। पानी टपकने से इन भवनों का प्लास्टर और फर्श टूटने लगा है। मकानों में सीलन की बदबू है। पानी टपकने से इनमें रहने वालों के कपड़े और फर्नीचर भी खराब होने लगे हैं।
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इन मकानों में से एक मकान में रहने वाले श्रीपाल सिंह की बेटी अंजली ने बताया कि पानी गिरने से कपड़े गल गए हैं। चारपाई और पलंग भी गलकर टूट गए हैं। परिवार अब जमीन पर सोने को मजबूर है। कांशीराम आवास संख्या ए-3/45 में रहने वाले नत्थू सिंह आवास खाली करके दूसरे आवास में चले गए हैं। उनको आवंटित यह आवास कभी भी गिर सकता है। यही हालत गुलाम नबी के आवास का है। अमन के आवास संख्या ए-3/14 की तो ईंट भी टूटकर गिरने लगी हैं। यह स्थिति तो भूतल का आवासों की है। इसी तरह ऊपर की दोनों मंजिलें खतरे की जद में आ गईं हैं।
हम गरीब लोग हैं। सरकार की ओर से यह आवास मिला था। पता नहीं, किस तरह से बनाए गए हैं? इनमें दिन रात पानी टपकता है। दीवार से प्लास्टर और फर्स टूटकर गिरने लगा है। जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो ये किसी दिन गिर सकते हैं।
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- शुभाना।

सीलन भरे मकान में रहने से लोग बीमार हो रहे हैं। सांस और त्वचा की बीमारियों से यहां बुरा हाल है। हर मौसम में मकानों में पानी टपकता है। इससे ये जर्जर हो गए हैं। इनका कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है।
- राखी।
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