मुरादाबाद। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बावजूद रामगंगा नदी के किनारे में ई-कचरा जलाने और धोने का काम धड़ल्ले से जारी है। अमर उजाला टीम जामा मस्जिद के पास के नदी के किनारे के एरिया का जायजा लिया। यहां मिट्टी के हौज बनाकर महिलायें और पुरुष जले हुए ई कचरा की राख को धोने में जुटे नजर आए। एक शख्स से पूछने पर उसने कहा - पानी को नदी में नहीं बहाया जाता, बल्कि हौज में ही सुखा दिया जाता है। यह दीगर है कि साफ दिख रहा था कि हौज का पानी रामगंगा नदी में ही जा रहा था।
लालबाग, जामा मस्जिद समेत नदी के किनारे के हिस्सों पर पीतल के वेस्ट माल से फिर से पीतल निकालने का काम होता है। बाकायदा मशीनों से वेस्ट माल को पीसा जाता है। इस पीसी हुई सामग्री को नदी के किनारे बने हौज में धोकर पीतल अलग किया जाता है। पीतल की आड़ में ई कचरा को पीसकर छाना जाता है। इसी ई कचरा की राख (ब्लैक डस्ट) को लेकर एनजीटी में मामला पहुंचा था। अब प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम को ब्लैक डस्ट के निस्तारण पर अपना पक्ष एनजीटी में रखना है।
प्रतिबंधित होने के बाद भी जलता है ई कचरा
नदी के दूसरी तरफ खेतों के किनारे कई जगह पर धुआं ऊपर उठ रहा था। थोड़ी सी पूछताछ के बाद स्पष्ट हुआ कि यहां खतरनाक ई-कचरा जलाया जाता है। हालांकि यह भी प्रतिबंधित है। प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की टीमों को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
कुछ दिन पहले मैने रामगंगा नदी किनारे ब्लैक डस्ट निस्तारण का जायजा लिया था। ई कचरा जलाने और वेस्ट माल को धोने प्रतिबंधित है। टीम भेजकर कार्रवाई कराई जाएगी। - संजय चौहान, नगर आयुक्त