मुरादाबाद। हवा चलने और कोहरा पड़ने से वायु गुणवत्ता सूचकांक में मामूली सुधार हुआ, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है। हवा की हालत अब अजीब सी हो गई है। कोहरा पड़ने से धूल-धुआं के हल्के कण कम हो गए हैं, जबकि मोटे कणों की संख्या बढ़ गई है। इसके साथ ही हानिकारक गैसों की मात्रा भी बढ़ी है।
हल्की हवा चलने का असर वायु की गुणवत्ता पर पड़ा है। सोमवार को हवा की हालत में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन वह अभी भी दमघोटू बनी हुई है। हवा चलने के साथ ही कोहरा पड़ने लगा। इससे हवा में नमी बढ़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्द्रता बढ़ने से धूल के बारीक कण एक साथ मिलकर मोटे हो गए। इससे पीएम-2.5 की तुलना में 10 की मात्रा बढ़ गई। इससे धूल कणों के कारण होने वाली परेशानी थोड़ी कम हुई है, लेकिन एनओ-2 की मात्रा में बढ़ोतरी हो गई। इससे लोगों के बीमार होने की आशंका बढ़ गई है।
सोमवार को वायु गुणवत्ता की स्थिति -
पीएम 2.5 158
पीएम-10 259
एनओ-2 109
एनएच-3 17
एसओ-2 31
सीओ 160
फेफड़े कड़े होने और दिल फैलने का खतरा - वरिष्ठ फिजीशियन डा. जीवी सिंह के अनुसार एसपीएम की ज्यादा मात्रा में लगातार रहने और कार्बन मोनोआक्साइड की मात्रा बढ़ने से शरीर को गंभीर नुकसान हो सकता है। सांस के साध धूल-धुआं के कण पहुंचने से फेफडे़ कड़े होने लगते हैं। इससे उनका सिकुड़ना-फैलना प्रभावित होता है। इसका असर सांस फूलने के रूप में दिखना शुरू हो जाता है। शरीर को आक्सीजन कम मिलने से दिल को तेजी से धड़कना पड़ता है। ऐसी हालत में दिल के फैलने का डर बना रहता है। लोगों को प्रदूषण वाली खुली हवा में सीधे सांस लेने से बचना चाहिए।
हवा में खतरा बरकरार है। फिलहाल मुंह पर कपड़ा लपेटकर चलने या अच्छी गुणवत्ता का मास्क लगाने की जरूरत है। लापरवाही न तो खुद करें और न ही बच्चों को करने दें। बारिश होने तक का इंतजार करना होगा।
- वीएस राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक।