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पीतल की भट्ठी भी बनी हैं चुनौती

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मुरादाबाद। शहर की हवा दमघोटू हो रही है। पीएम-2.5 और पीएम-10 के कणों से सांस लेना दूभर हो रहा है। धूल के साथ ही धुआं मिल जाने से गंभीर बीमारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद शहर में 12 हजार से ज्यादा पीतल भट्टियां हवा में जहर घोल रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कई बार इनको आबादी से बाहर करने के निर्देश जारी कर चुका है। उसके बावजूद पीतल भट्ठियों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है।
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आवासीय क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का संचालन नहीं हो सकता है। आवास क्षेत्रों में न तो विद्युत निगम उद्योगों को कनेक्शन दे सकता है और न ही उद्योग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इनको लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं। यहां तक की सामान्य श्रेणी के उद्योग भी आवासीय क्षेत्रों में संचालित नहीं हो सकते हैं। इन नियमों को ताक पर रखकर सेहत के लिए घातक श्रेणी के उद्योग शहर के बीच में चल रहे हैं। इनसे जल, वायु और ध्वनि प्रदूषण धड़ल्ले से हो रहा है। यह मामला कई बार प्रशासन और उद्योग बंधु की बैठक में उठाया जा चुका है।
आबादी से पीतल की भट्ठियों को बाहर करने का जिम्मा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सौंपा गया है। वहीं बोर्ड के अधिकारियों ने इससे हाथ खड़े कर दिए हैं। बोर्ड अफसरों का कहना है कि यह उद्योग विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने ही भट्ठियों को लैंड यूज चेंज किए बिना लाइसेंस जारी कर दिए हैं। बोर्ड अफसर पूरा मामला उद्योग विभाग पर डाल रहे हैं।
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हमने कई बार मीटिंग में इस मामले को उठाया है। पीतल भट्टियों को शहर के बाहर भेजा जाए या इनको गैस संचालित कराकर प्रदूषण मुक्त किया जाए। कुछ लेगों की हठ व रोजगार के चलते हजारों लोगों की सेहत को संकट में नहीं डाला जा सकता। इनको हटवाने की जिम्मेदारी उद्योग विभाग की है।
- इ. आरके सिंह, आरओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

हमने किसी को लाइसेंस जारी नहीं किए हैं। हमारे स्तर से नहीं हटाया जा सकता है। इनको बाहर करने की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासनिक अफसरों की है। हम शहर के अंदर लाइसेंस देते ही नहीं हैं।
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- देश बंधु गौतम, डिप्टी डायरेक्टर उद्योग विभाग।
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