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प्रदूषण से गर्भवतियों को ज्यादा नुकसान

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मुरादाबाद। वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब होने से यों तो सभी की सेहत खराब हो रही है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बीमारोें और बुजुर्गों पर पड़ता है। एसपीएम के साथ ही जहरीली गैसों का स्तर बढ़ रहा है। इससे लोगों के शरीर में महत्वपूर्ण उपापचय क्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।
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सेहत के लिए सबसे पहली जरूरत शुद्ध हवा होती है। हवा में एसपीएम की मात्रा बढ़ने से फेफड़ों की सक्रियता प्रभावित होती है। ऐसे में आक्सीजन सही मात्रा में रक्त में नहीं मिल पाती है और शरीर में कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है। इसके साथ ही ग्लेंड्स का स्राव प्रभावित होने से रक्त में यूरिया भी बढ़ने लगता है। ऐसे माहौल में ज्यादा समय रहने पर लोग हाईबीपी और हाइपरटेंशन के शिकार हो जाते हैं। उनकी किडनी पर खतरा मंडराने लगता है। हवा में जिस तरह से एनओ-2, एसओ-2, एनएच-3 और सीओ की मात्रा बढ़ जाती है। उससे सेहत पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र कुमार के अनुसार प्रदूषण में ज्यादा समय रहने से बच्चों और भ्रूण का विकास रुक जाता है। शरीर में होने वाले जरूरी स्राव प्रभावित होने से खतरा बढ़ जात है। मौजूदा हालात को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
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