जंगल छोड़कर आबादी के करीब पहुंच रहे तेंदुए आसान शिकार बन रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 746 तेंदुओं का शिकार कर लिया गया। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी 150 से ज्यादा का शिकार हो चुका है। मानव संघर्ष के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि तेंदुओं की अधिकृत गणना नहीं होती है लेकिन देश भर में इनकी संख्या लगभग 14000 है।
वन विशेषज्ञों का जो अनुमान है उसके मुताबिक उत्तर प्रदेश में पहाड़ी क्षेत्र से सटा जो भी इलाका है वहां तेंदुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुरादाबाद, अमरोहा, नजीबाबाद, बिजनौर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, मेरठ और गढ़ मुक्तेश्वर में तो तेंदुए कई दफा गांवों के करीब पहुंचे भी हैं। गन्ने के खेतों में इनके शावक भी मिल चुके हैं।
भारत सरकार में प्रोजेक्ट टाइगर के पूर्व डायरेक्टर डा. रामलखन सिंह का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भी टाइगर की संख्या अधिक होती है वहां तेंदुए जंगल से बाहर आने लगते हैं। तेंदुए की जंगल से बाहर आने की दूसरी सबसे बड़ी वजह आसान शिकार की तलाश है। कुत्ता तेंदुए का पसंदीदा भोजन होता है। नीलगाय भी जंगलों में अधिक रहती है लिहाजा खेत में बैठकर तेंदुआ शिकार कर लेता है।