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मेरठ कमिश्नरी के 642 उद्यमी रिस्की कैटेगरी में शामिल, फंसा दो सौ करोड़ का रिफंड

Sat, 29 Aug 2020 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित मुद्गल, अमर उजाला, मुरादाबाद
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आईजीएसटी रिफंड के लिए मुरादाबाद के लगभग 350 निर्यातकों को रिस्की कैटगरी में डाल दिया गया है। इसका परिणाम यह रहा है कि इन निर्यातकों का लगभग दो सौ करोड़ का आईजीएसटी रिफंड फंस गया है। मेरठ कमिश्नरी में कुल 642 उद्यमियों को इस रिस्की कैटगरी में शामिल किया गया है। निर्यातकों का कहना है कि जो सही हैं और जिनकेदस्तावेज दुरुस्त हैं उनका तो रिफंड किया जाए।

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कोरोना काल में वैसे ही व्यवसाय मंदा होने से उद्यमी परेशान हैं। ऊपर से टैक्स एवं रिफंड संबंधी परेशानियां भी पीछा नहीं छोड़ रही हैं। मुरादाबाद निर्यातकों का शहर है और यहां के निर्यातक विश्व भर में व्यापार करते हैं। खास तौर पर हैंडीक्राफ्ट्स आयटम भेजे जाते हैं। 

हाल ही में हुए आईएचजीएफ फेयर में यहां के उद्यमियों का खासा योगदान रहा। इसमें इंडिया केअलावा आस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चाड, चिली, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इक्वाडोर, मिस्र ,फिजी, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हांगकांग, आयरलैंड, इज़राइल, इटली, जापान, कुवैत, लेबनान, लिथुवानिया, लक्ज़मबर्ग, मारीशस, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूकैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नार्वे, ओमान, फिलीपींस, पुर्तगाल, पुअर्टोरिको, रूस, सउदी अरब, सर्बिया एंड मॉटेनेग्रो, सिंगापुर, दक्षिणी अफ्रीका, स्पेन, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, ताइवान, थाईलैंड, तुर्की, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, यूके, अमरीका, उरुग्वे आदि आदि देशों के उद्यमियों ने भाग लिया था पर भारत के व्यापार को इससे अलग दिशा मिली।
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.....पर आईजीएसटी रिफंड में फंसकर रह गए
बाजवूद इसके यहां के निर्यातक इस समय बुरी तरह से आईजीएसटी रिफंड के चक्कर में फंसे हैं। दरअसल यहां के लगभग 350 निर्यातकों को रिस्की कैटगरी में डाल दिया गया है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट की इस लिस्ट में मेरठ कमिश्नरी के 342  उद्यमी शामिल किए गए हैं और सभी का आईजीएसटी रिफंड रोका गया है। सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसमें मुरादाबाद के पचास निर्यातकों को राहत मिली है और उन्हें रिफंड भी हुआ है पर बाकी लगभग तीन निर्यातक बुरी तरह से फंसे हैं।

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रेड मार्क होने से कस्टम विभाग पूरा माल खोलकर कर रहा है चेक

सूची में ऐसे निर्यातकों का रेड मार्क होने से अन्य परेशानी भी खड़ी हो रही है। जहां भी माल की शिपमेंट जाती है वहां कस्टम विभाग पूरे माल को खोलकर चेक करता है और उसके बाद फिर से उसे पैक करता है। अब इस पैकिंग में वह विशेषज्ञता तो आती नहीं। ऐसे में माल के खराब होने या नुकसान होने का डर बना रहता है।

कुछ ने किया खेल, सभी रहे झेल
कुछ उद्यमियों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर क्लेम किया और फर्जी तरीके से आईजीएसटी रिफंड ले लिया। उसी की जांच चल रही है। यही कारण है राजस्व विभाग ने काफी उद्यमियों को रिस्की कैटगरी में डाल दिया। सभी की जांच की जा रही है और दस्तावेज मांगे गए हैं। यह पूरा रिफंड पिछले साल का है।

वेबिनार में उठाए सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब
इस मसले पर शुक्रवार को लघु उद्योग भारती मुरादाबाद की तत्वावधान में वेबिनार का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता इस इकाई के अध्यक्ष अंशुल अग्रवाल ने की। इसमें लघु उद्योग भारती के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जीएसटी काउंसिल केसदस्य ओपी मित्तल ने इसी मसले पर निर्यातकों से बात की। मीटिंग में कांउसिल के स्वतंत्र सलाहकार अर्पित मित्तल भी मौजूद रहे। दोनों ने बताया यह समस्या क्यों हुई है और इसके लिए दस्तावेजों को किसी तरह से तैयार किया जा सकता है। बैठक में इकाई केप्रदेश सचिव अजय गुप्ता, अजय शाह, हिमांशु मेहरा, रचित माहेश्वरी, सतपाल पुगला, विकास महाजन, नीरज रस्तौगी, नितिश अग्रवाल, अमित अग्रवाल, शरद बंसल, रोहित ढल, गौरव ओहरी, हिमांशु बंसल, अंकुश गोयल आदि मौजूद रहे।
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