मुरादाबाद। रामगंगा किनारे पड़ी ई-डस्ट से भूजल और रामगंगा के पानी में विषाक्त पदार्थ घुल रहे हैं। एनजीटी की सख्ती के बावजूद डस्ट उठाने का काम औपचारिकता तक सिमटकर रह गया है। कुंभ लगने वाला है। ऐसे में ई-डस्ट रामगंगा से बहाव के साथ गंगा में बहकर पहुंचेगी। लोगों को इससे होने वाले नुकसान को झेलना पड़ेगा।
रामगंगा किनारे धड़ल्ले से ई-कचरा जलाया जाता रहा है। ई-कचरा के जलने से रामगंगा के किनारे पर दो सौ ट्रक से ज्यादा ब्लैक डस्ट इकट्ठा हो गई। इसमें मिले घातक रसायन एक ओर जहां भूजल में मिलने लगे, वहीं रामगंगा के पानी में बहकर दूर तक जाने लगे। इससे लोगों को गंभीर बीमारी होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन के संज्ञान न लेने पर इस पर एनजीटी ने संज्ञान लिया और प्रशासन को तलब किया। एनजीटी ने अधिकारियों को ब्लैक डस्ट को तत्काल उठवाने के आदेश दिए, लेकिन पालन नहीं किया गया। इसके चलते जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार पर जुर्माना भी लगाया गया। एनजीटी की सख्ती के बावजूद डस्ट का उठान नहीं कराया जा रहा है। नगर निगम के कूड़ा संग्रह केंद्र पर इसका भंडारण किया जा रहा है। दो महीने का समय बीतने के बावजूद मात्र कुछ ट्राली डस्ट ही उठाई जा सकी है।
कुंभ मेला शुरू होने वाला है। गंगा की सहायक नदी रामगंगा में बहकर डस्ट के घातक केमिकल इलाहाबाद तक पहुंच सकते हैं। उसके बावजूद मामले में तेजी नहीं लाई जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि ब्लैक डस्ट इतनी कड़ी हो जाती है कि यह पानी में नहीं बह सकती है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि डस्ट से रिसकर घातक रसायन नदी के पानी में मिल जाते हैं और बहकर गंगा तक पहुंचते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ आरके सिंह का कहना है कि डस्ट का उठान शुरू करा दिया गया है। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम और जिला प्रशासन की है। ज्यादा मात्रा होने के कारण इसको उठवाने में वक्त लगेगा। गंगा तक इसके केमिकल पार्टीकल्स के पहुंचने की आशंका नहीं है।