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अब बच्चे नहीं बोलते अंकल दवा कड़वी है

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मुरादाबाद।
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टीबी उन्मूलन अभियान में सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए अब स्ट्रॉबरी, चॉकलेट, मैंगो और ओरेंज फ्लेवर में टीबी की दवाएं आ गई हैं। दवा घुलनशील के साथ अलग-अलग स्वाद युक्त होने से बच्चे इसे खाने में मुंह नहीं बना रहे हैं।
टीबी एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है। कमजोर इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) वाले इस बैक्टीरिया के आसानी से शिकार हो जाते हैं। सरकारी अस्पतालों में इसका फ्री इलाज है। कई बार मरीज इलाज शुरू कराने के बाद अधूरा छोड़ देता है। इससे बैक्टीरिया उसके परिवार और संपर्क में आने वालों में फैल जाते हैं। मुरादाबाद में टीबी के मरीजों की संख्या काफी अधिक है। सालाना करीब 11 हजार मरीजों का निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज होता है। इनमें सात फीसदी संख्या बच्चों की है। टीबी की दवा कड़वी होने से बच्चे इसे खाने में बहाने बनाते थे। कई बार उल्टी कर देते थे, जिससे दवा बेअसर हो जाती थी। बच्चों की इस परेशानी को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में चॉकलेट, स्ट्रॉबरी, मैंगो और ओरेंज के स्वाद की दवा आ गई है। जिसे बच्चे आसानी से खाने लगे हैं।
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टीबी रोगी खोज अभियान में 608 मरीज मिले
मुरादाबाद जिले में जनवरी प्रथम चरण में 82 मरीज चिह्नित हुए। मार्च दूसरे चरण में 194 और जून में चलाए गए तीसरे चरण में 206 टीबी के मरीज ढूंढे गए। सितंबर में चौथे चरण में 467531 लोगों की स्क्रीनिंग में 4035 संदिग्ध मरीजों में से 126 टीबी के रोगी मिले। चिह्नित सभी मरीजों का इलाज शुरू कराया जा चुका है।

- मुरादाबाद जिले में टीबी जांच की 32 माइक्रोस्कोपी सेंटर और 50 स्पूटम कलेक्शन सेंटर हैं। 16 टीबी यूनिट हैं। जिला क्षय रोग अस्पताल, जिला अस्पताल और ठाकुरद्वारा में सीबी नेट लैब हैं। जहां संदिग्ध मरीजों की टीबी की जांच कराई जाती है। - डा. डीके प्रेमी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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- जिले में सरकारी अस्पतालों 2015-2016 में 28809 मरीजों की जांच की गई और इनमें 3399 टीबी रोगी मिले। 2016-2017 में 30755 की जांच के बाद 2865 मरीज मिले। 2017-2018 में 32279 लोगों की जांच के बाद 2335 लोगों की टीबी मिली। - डा. जावेद, जिला समन्वयक
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