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Moradabad News: होली पर 56 लोगों की आंखों में गिरा रंग....तीन बच्चों रोशनी गई

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मुरादाबाद। होली के दौरान इस्तेमाल किए गए केमिकल वाले रंगों ने इस बार कई लोगों की आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में बुधवार और बृहस्पतिवार को कुल 56 मरीज आंखों में जलन, सूजन और चोट की शिकायत लेकर पहुंचे। इनमें तीन बच्चों की आंखों की रोशनी लगभग चली गई, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के हायर सेंटर भेजा गया है। डॉक्टरों के अनुसार कई मामलों में आंखों में केमिकल वाला रंग जाने से काली पुतली और रेटिना को नुकसान पहुंचा है। कुछ मामलों में रंग वाले गुब्बारे या छोटे सिलिंडर के फटने से आंखों पर गंभीर चोट लगी है।
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केस वन

रंग का सिलिंडर फटने से रेटिना प्रभावित

सातवीं कक्षा के एक छात्र की आंख के पास रंग वाला छोटा सिलिंडर फट गया। इससे उसकी आंख को गंभीर चोट पहुंची और रेटिना प्रभावित हो गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी सर्जरी करनी पड़ सकती है और उसे लंबे समय तक इलाज की जरूरत पड़ेगी।


आंख में रंग जाने के बाद मसलने से बिगड़ी हालत

दो बच्चों की आंखों में केमिकल वाला रंग चला गया। जलन होने पर उन्होंने आंखें मसल लीं, जिससे काली पुतली की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त हो गई। अब उन्हें आंख खोलने में भी परेशानी हो रही है। दोनों बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए डॉक्टर ने स्कूल में राइटर देने के लिए प्रमाण पत्र जारी किया है।
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गुब्बारा लगने से खिसक गया पर्दा

चार मामलों में होली खेलते समय रंग भरा गुब्बारा सीधे आंख पर लग गया। इससे आंख का पर्दा खिसक गया और मरीजों को धुंधला दिखाई देने लगा। डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मरीजों को लंबे समय तक इलाज और निगरानी की जरूरत पड़ेगी।


डॉक्टरों की सलाह





होली के बाद बड़ी संख्या में आंखों के मरीज पहुंचे हैं। कई मामलों में केमिकल रंगों से काली पुतली और रेटिना को नुकसान पहुंचा है। लोगों को आंख में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए और बिना देरी डॉक्टर से उपचार कराएं।

- डॉ. आशि खुराना, नेत्र सर्जन

दो बच्चों की आंखों में रंग जाने के बाद उन्होंने आंखें मसल लीं, जिससे पुतली की ऊपरी परत खराब हो गई। अब उन्हें आंखें खोलने में भी परेशानी हो रही है। अभिभावकों को बच्चों को सुरक्षित तरीके से होली खेलने के लिए जागरूक करना चाहिए।

- डॉ. स्मिता गोयल, नेत्र सर्जन

इस बार होली के बाद आंखों से जुड़े मामलों की संख्या पिछले साल की तुलना में ज्यादा रही है। केमिकल रंग, गुब्बारे और रंग वाले सिलिंडर आंखों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। लोगों को प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना चाहिए।
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- डॉ. पल्लव अग्रवाल, नेत्र सर्जन
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