मुरादाबाद। लोकसभा चुनाव के महासमर में रामगंगा को भी एक ‘तारणहार’ की दरकार है। हालांकि अभी यह मुद्दा किसी सियासी दल की प्राथमिकता में शामिल नहीं है। राजनीतिक उपेक्षा और अफसरों की अनदेखी की वजह से रामगंगा का बड़ा हिस्सा महज तबेला बनकर रह गया है। शहर के नाले रामगंगा में सीधे गंदगी उगल रहे हैं। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बना तो जरूर है लेकिन बनने के बाद से ही दो साल से बंद पड़ा है। ऐसे में सीवर और नालों की गंदगी रामगंगा में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रही है। 2010 की बाढ़ के बाद रामगंगा किनारे 12 किमी लंबा तटबंध बनाने की घोषणा हुई थी लेकिन यह घोषणा आज तक अमलीजामा नहीं पहन सकी। आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ यहां तटबंध निर्माण की संभावनाओं को खारिज कर चुके हैं। वजह यह है कि रामगंगा किनारे जिस भूमि पर तटबंध का निर्माण प्रस्तावित है, वहां अवैध निर्माण हो चुके हैं। नागफनी थाना क्षेत्र में जिगर कालोनी से नवाबपुरा, दसवां घाट और आगे मुगलपुरा थाना क्षेत्र में काली मंदिर से लेकर जामा मस्जिद और आगे कटघर इलाके में कटघर पुल तक रामगंगा पर अवैध कब्जे करके दर्जनों टाट टप्पर कालोनियां बना दी गई हैं। अवैध कब्जों का यह सिलसिला इन इलाकों में अभी भी जारी है।
नालों के जरिये नदी में पहुंचता है उद्योगों का कचरा
रामगंगा में मुरादाबाद शहर का 90 मिलियन लीटर गंदा पानी प्रतिदिन 23 बने नालों के जरिए इसमें गिर रहा है। इसमें ई कचरा भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, 99 छोटे नालों से गंदा पानी रामगंगा में गिरकर नदी को प्रदूषित कर रहा है। रामगंगा के किनारे बसे चक्कर की मिलक, बगला गांव, नवाबपुरा, लालबाग, जामा मस्जिद, बरवालान, कटघर आदि के कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी छोटी नालों के जरिए रामगंगा में पहुंच रहा है। इसमें ई कचरा, पीतल की सिल्ली की राख आदि भी पानी में मौजूद रहता है।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने पर बनेगी बात
सीवर लाइन के निर्माण का कार्य जलनिगम कर रहा है। नेशनल हाईवे, रेलवे कॉलोनी, पीलीकोठी, से फव्वारा, फव्वारा से जैन मंदिर, जैन मंदिर से गंज गुरहट्टी चौराह, नीम की प्याऊ और टाउनहॉल और चौमुखापुल आदि क्षेत्रों में सीवर लाइन डालने काम तकरीबन पूरा हो चुका है, लेकिन लाइन चालू नहीं हो सकी है। गुलाबबाड़ी में तैयार 58 मिलियन की क्षमता का प्लांट तैयार हो गया है। लेकिन सिर्फ 15 मिलियन पानी ही ट्रीटमेंट हो पा रहा है। बाकी सभी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट ठप पड़े है। जामा मस्जिद पर बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से सटी हुई नाली से ही गंदा पानी रामगंगा में जाकर गिरता हुआ मिला।
एनजीटी की सख्ती के बाद भी धुल रही राख
मुरादाबाद।
एनजीटी की सख्ती के बाद भी रामगंगा में ई कचरा धोकर राख बहाने का कार्य चल रहा है। काली मंदिर के पास नवाबपुरा इलाके में लोग रामगंगा किनारे ई डस्ट के ढेर धोकर उसकी राख को रामगंगा में बहा रहे हैं।
1975 तक रामगंगा का पानी इतना स्वच्छ था कि हम सीधे पी सकते थे। 1978 तक वहां घूमने जाते थे। फिर कालागढ़ डैम बनने के बाद स्थिति बिगड़ गई। उद्योगों के ई कचरा और सीवर का पानी सीधे नदी में गिरने से अब नाला में तब्दील हो गई है।
- वीरेंद्र कुमार, मंडी चौक
चुनाव के वक्त रामगंगा की स्वच्छता की बात उठती है, लेकिन कोई भी पार्टी इस दिशा में काम नहीं करती है। शहर को सभी स्वस्थ और स्वच्छ होगा जब उसकी नदी साफ होगी। - मुनशुब हुसैन, जीआईसी चौराहा
नदी के किनारों पर लोगों ने अवैध निर्माण करा लिए है। उद्योगों का ई कचरा ने पानी को प्रदूषित कर दिया है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बन चुके हैं, लेकिन काम नहीं करते है। अब बड़े बदलाव की जरूरत है। - मोहम्मद अजहर, जीआईसी चौराहा
नदी की स्वच्छता के लिए सिर्फ बातें होती है। भारी भरकम बजट जारी हो जाते हैं। लेकिन हकीकत में होता कुछ नहीं है। नदी के किनारे बांध बनना था, लेकिन वह भी नहीं बन सका। - विवेक अग्रवाल, पान दरीबा।