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एक बोझ है दिल में उठा भी नहीं सकता...

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मुरादाबाद।
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मंडलीय खादी एवं ग्रामोद्योग प्रदर्शनी के चौथे दिन मुशायरा का आयोजन हुआ। शायरों ने एक से बढ़कर एक नज्मों की प्रस्तुति देकर समा बांध दिया। देर रात तक महफिल जमी और श्रोताओं की तालियों की गूंज रही।
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पंचायत भवन में आयोजित मुशायरे की शुरुआत जिया जमीर ने की। उन्होंने कहा, किसी बच्चे से पिंजरा खुल गया है परिंदे की रिहाई हो रही है। डा. मुजाहिद ने कहा, कहीं कहीं पर वफा का निशान बाकी है, कहीं कही पे हिंदुस्तान बाकी है। कृष्ण कुमार नाज ने कहा, जो खुद हो उदास वो क्या खुशी लुटाएगा, बुझे दिए से दिया कैसे जलाएगा। मशहूर शायर मंसूर उस्मानी ने कहा, एक बोझ है दिल पर उठा भी नहीं सकता, क्या बोझ है दिल पर यह बता भी नहीं सकता। उस्मानी की शायरी पर श्रोताओं की तालियों से गूंज उठा। एनएस राघव ने कहा, आपस में मिलजुलकर मेरा गीत अमर कर दो, ना जात की सीमा ना देश कहो बंधन आपस में मिलजुलकर नई रित अमर कर दो। इससे पूर्व मशहूर शायर मंसूर उस्मानी, मुख्य विकास अधिकारी मृदुल चौधरी, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी गजेंद्र सिंह और कृष्ण कुमार ने दीप प्रज्वलित कर मुशायरा का उद्घाटन किया। इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुपमा, मो हाशिम, डा. सुनीत गिरी, डा. विश्वास शर्मा, राजीव शर्मा, आदिल और वंदना शर्मा समेत कई लोग मौजूद रहे।
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