दवा व्यापार में ई-फार्मेसी को बढ़ावा देने की अधिसूचना के विरोध में शुक्रवार को दवा की दुकानें बंद रहने से मरीजों को भटकना पड़ा। दवाओं के लिए मरीज परेशान रहे। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर दवा लेने वालों की भीड़ रही। जन औषधि केेंद्रों पर सीमित दवाएं उपलब्ध होने से मरीजों को निराश लौटना पड़ा। दवा दुकानें बंद होने से मुरादाबाद में करीब 10 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
केमिस्ट ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव शहजाद अख्तर के मुताबिक मुरादाबाद में दवा की 3100 दुकानें हैं। इनमें करीब 1800 दुकानें फुटकर दवा की हैं। थोक दुकानों से पूरे मंडल को दवा की आपूर्ति होती है। रोजाना औसतन 10 करोड़ का दवा कारोबार होता है। शुक्रवार को दवा की दुकानें पूरी तरह बंद रही। नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोरों के भी शटर गिरने से मरीज और तीमारदार जन औषधि केंद्रों तक पहुंचे। अधिकतर दवाएं केंद्रों पर भी नहीं मिली।
जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र में छह सौ दवाएं और 160 सर्जिकल आइटमों की बिक्री का अनुबंध है। औषधि केंद्र में मात्र 150 दवाएं और 12 सर्जिकल आइटम हैं। शुक्रवार को केंद्र में दवा लेने के लिए लाइन लगी रही। फार्मेसिस्ट कैलाश ने बताया कि देर शाम तक केंद्र खुला और भीड़ रही। कैलाश ने बताया कि जिला अस्पताल के कई डाक्टर निजी कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं, जिससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। फार्मेसिस्ट कैलाश ने बताया कि इस महीने के आखिर तक केंद्र में बिक्री के लिए अनुबंधित सभी दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।