फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टिकट में देरी ने बढ़ाई सांसदों की धड़कनें

विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद (उमेश शर्मा)। मंडल की सभी छह लोकसभा सीटों पर काबिज भाजपा सांसदों को 2019 के चुनावी समर में अपना टिकट बचाना मुश्किल हो गया है। संघ और भाजपा के कुछ अहम ओहदेदारों का संकेत है कि मंडल में ज्यादातर सांसदों को चुनावी रण से बाहर बैठना पड़ सकता है। पार्टी यहां से नए चेहरों को उतारने का मन बना चुकी है। संघ के ओहदेदारों ने इसके संकेत भी सांसदों को दे दिए हैं। इसके बाद से सांसदों ने टिकट बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। दिल्ली की मीटिंगें सांसदों की धड़कनें बढ़ा रही हैं।
विज्ञापन

मुरादाबाद मंडल में मुरादाबाद, संभल, रामपुर, अमरोहा, बिजनौर और नगीना को मिलाकर लोकसभा की कुल छह सीटें हैं। इन सभी छह सीटों पर भाजपा काबिज है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट पर भाजपा के कुंवर सर्वेश सिंह सपा के डा. एसटी हसन को 93 हजार से अधिक वोटों से हराकर सांसद बने थे। रामपुर में डा. नैपाल सिंह ने आजम के करीबी नसीर खां को 27 हजार वोटों से शिकस्त देकर जीत दर्ज की थी। संभल में संघ बैकग्राउंड वाले सत्यपाल सिंह सैनी ने सपा के शफीकुर्रहमान बर्क को करीब पांच हजार वोटों से हराकर पहली बार इस सीट पर भाजपा का खाता खोला था। बिजनौर से कुंवर भारतेंदु ने सपा के शहनवाज राना को दो लाख से अधिक वोटों से हराया था और नगीना से यशवंत सिंह सपा के यशवीर सिंह को 92 हजार वोटों से हराकर सांसद बने थे।
लेकिन भाजपा के सूत्रों पर यकीन करें तो अब इनमें से ज्यादातर सांसदों को पार्टी 2019 के समर में चुनाव मैदान से बाहर बैठाने का फैसला कर चुकी है। इसके पीछे अलग - अलग कारण बताए जा रहे हैं। कहीं शाह के जासूसों की कसौटी पर सांसद खरे नहीं उतरे तो कहीं सपा - बसपा गठबंधन के बाद उपजे हालातों से निपटने के लिए पार्टी ने बड़े चेहरों को उतारने का मन बनाया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सांसदों को इस बात से अंधेरे में भी नहीं रखा गया है। बल्कि संघ के कुछ अहम पदाधिकारियों की ओर से इस बाबत सांसदों को संकेत दिए जा चुके हैं। इसके बाद सांसदों ने टिकट बचाने के लिए जोड़तोड़ करना शुरू कर दी है। टिकट के लिए तीन दिन से लगातार भाजपा सांसद दिल्ली पर नजरें गढ़ाए हैं। लगातार होती बैठकों और सूची जारी होने में हो रही देरी ने सांसदों की सांस अटका रखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें