पद्मश्री दिलशाद हुसैन : इन्हें नक्काशी का उस्ताद और शिल्पगुरु भी कहा जाता है। 2023 के पद्म पुरस्कारों की सूची में इनका नाम पद्मश्री के लिए चुना गया। दिलशाद ने पीएम मोदी को मुरादाबाद की नक्काशी वाला पीतल का मटका भेंट किया था, जोकि मोदी ने जर्मनी की चांसलर को भेंट किया।
पद्मश्री बाबूराम यादव : पिछले छह दशकों से पारंपरिक शिल्प कला तकनीकों का उपयोग करके पीतल की कलाकृतियां बना रहे बाबूराम यादव को 2024 में पद्मश्री मिला। वर्ष 2014 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों शिल्प गुरु सम्मान भी मिल चुका है। 74 वर्षीय बाबूराम को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं।
कारगिल शहीद अरविंद सिंह : कांठ क्षेत्र के गांव मिलक आवी हफीजपुर निवासी कारगिल के अमर शहीद अरविंद सिंह की शहादत को कोई भुला नहीं सकता। पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में दो गोलियां लगने के बावजूद अरविंद पीछे नहीं हटे थे। मोर्चा संभालते हुए 29 जून 1999 को वह बलिदान हो गए थे। उनके माता-पिता को सम्मानित किया जाएगा।
एवरेस्ट से ऊंचा हौसला रखने वाले पर्वतारोही रवि कुमार : भोला सिंह की मिलक निवासी अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही रवि कुमार को मरणोपरांत भारत के सर्वश्रेष्ठ साहसिक पुरस्कार तेनजिंग नॉर्गे अवाॅर्ड से नवाजा जा चुका है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में उनके पिता हरकेश सिंह ने यह पुरस्कार प्राप्त किया था। रवि कई पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहरा चुके थे। 22 मई 2017 को माउंट एवरेस्ट से उतरते समय तूफान में उनकी मौत हो गई थी। उने परिवार को सम्मानित किया जाएगा।
थैलेसीमिया को खेल से मात दे रहे कुनाल : 26 वर्षीय कुनाल अरोरा पैरा टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। वह जब तीन माह के थे तो उनके पिता को इस बीमारी का पता चला। तब से अब तक कुनाल को हर 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है। कुनाल अपने खेल के बल पर इस घातक बीमारी को मात दे रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पुरस्कार जीत चुके हैं।
मुरादाबाद एक्सप्रेस जैनुल आबेदीन : अल्ट्रा रनर जैनुल आबेदीन को शहर के लोग मुरादाबाद एक्सप्रेस के नाम से भी जानते हैं। वह पुलिस व सशस्त्र सीमा बल के लिए कई सौ किलोमीटर दौड़ चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने गंगा की स्वच्छता के लिए पुलिस के साथ मिलकर प्रयागराज से मुरादाबाद तक की दौड़ पूरी की थी। ट्रेडमिल पर लगातार दौड़ने के मामले में वह रिकॉर्ड के लिए दावेदारी ठोक चुके हैं।
रिकॉर्ड होल्डर जैन सिराज : कक्षा चार के जैन सिराज ने हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके माता-पिता शहर के नामचीन डॉक्टर हैं। सिराज ने कुछ सेकेंड में कई देशों की राजधानी बताकर अपने आई क्यू लेवल का परिचय दिया था। इसके बाद सिराज का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
कॉमनवेल्थ खिलाड़ी सरिता सिंह : रेलवे कर्मचारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की हैमर थ्रो खिलाड़ी सरिता सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में मुरादाबाद का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। हैमर थ्रो का राष्ट्रीय रिकॉर्ड उनके नाम ही दर्ज है। एशियन गेम्स में देश को पदक दिला चुकी सरिता सिंह अपने शहर की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
शिक्षिका व लेखिका डॉ. ऋचा पाठक : ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बेटियों की शिक्षा को लेकर कितनी चुनौतियां हैं, इसे डॉ. ऋचा पाठक के उपन्यास घूंघट पट के जरिये समझा जा सकता है। इस उपन्यास के लिए डॉ. ऋचा को राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की ओर से हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार मिल चुका है। वह राजकीय कन्या इंटर कॉलेज रामपुर घोघर की प्रधानाचार्य हैं।
प्रगतिशील किसान आरेंद्र बड़गोती : जिले के प्रगतिशील किसान आरेंद्र बड़गोती पहले सब्जी व गन्ने की खेती करते थे। बाजार में सही रेट न मिलने के कारण उन्होंने जैविक गन्ना और मिलेट्स की खेती शुरू की। कृषि विभाग की मदद से फैमिली फार्मर के नाम से एफपीओ का गठन किया। अब वह गन्ने व मिलेट्स से लड्डू, बर्फी, मनकीन, समोसा, आइसक्रीम आदि उत्पाद बनाते हैं, जिनकी बाजार में बहुत मांग है।
पर्यावरण सचेतक राम सिंह बिष्ट : बुद्धि विहार निवासी पर्यावरण सचेतक राम सिंह बिष्ट पिछले तीन दशक से पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रहे हैं। पौधरोपण से लेकर नदियों को बचाने के अभियान में भी उनकी भागीदारी है। उन्हें इस कार्य के लिए कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं।